Halloween party ideas 2015

DUSSEHRA ARTICLE IN HINDI
विजयादशमी की हार्दिक शुभ कामनाएं  



अब खत्म करना होगा आतंक के रावण को 
          समय के प्रवाह में जाने कितनी सदियां बह गई, लेकिन बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य यानि रावण पर राम की विजय का महापर्व आज भी हमारे समाज में पूरी श्रद्धा और आकर्षण के साथ रचा-बसा है। भगवान राम ने सच्चाई और साहस के बल पर असत्य, पाखंड और दुराचार के रावण का विनाश किया था। यह कालजयी घटना हमारी आत्मा की गहराइयों में आज भी जीवित है।
                   विजयादशमी आत्मबल प्राप्त करने का पर्व है, आत्मबल से विजय अवश्यंभावी है। आत्मबल के लिए शक्ति का साथ आवश्यक है और उपासना एवं शारीरिक दृष्टि से पुष्ट होने के लिए शरद ऋतु महत्वपूर्ण है। शरद ऋतु के शुक्ल पक्ष की यह दशमी विजय का उल्लास लेकर हमारे जीवन में उतरती है। राम की विजय और शक्ति साधना पूरी होने की तिथि एक ही है। राम ने नवरात्रि में शक्ति की आराधना की तब जाकर दसवें दिन रावण का संहार कर सके। जब कल्याण असत्य के पक्ष में हो जाएगा तो सत्य और शक्ति के सामने उसे झुकना ही पड़ेगा। जीवन में दुष्प्रवृत्तियों के विनाश के लिए सत्य को शक्ति की आराधना करनी होगी।
                   विजयादशमी आसुरी और राक्षसी प्रवृत्तियों से लड़कर इसे समाप्त करके मानवता को इससे मुक्ति दिलाने का पर्व है। संसार में जब भी आसुरी प्रवृत्तियों ने सिर उठाया देर सबेर उसका सर्वनाश ही हुआ है। आज का सबसे भयानक रावण आतंकवाद मानव जाति पर फिर कहर ढा रही है। इस रावण के कई सिर हैं। लेकिन हमारा गौरवशाली इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी आतंकवाद ने किसी भी रूप में सिर उठाया है, निश्चित रूप से उसका अंत हुआ है। बुराइयों का अंत अवश्यंभावी है। जब सत्य अपनी पूरी शक्ति के साथ प्रकट होता है, तो असत्य की सारी रुकावटें ध्वस्त हो जाती हैं। 


--उमेश कुमार साहू 


महान वैज्ञानिक,इंजीनियर और राष्ट्र निर्माण में अपना जीवन समर्पित करने वाले डॉ. विश्वेश्वरैया को भारत ही नहीं, विश्व की महान प्रतिभाओं में गिना जाता है. भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जीवन से जुडी एक प्रेरक प्रसंग आपके लिए प्रस्तुत है इस वीडियो में -


वीडियो देखें :- https://youtu.be/T7CHyVxasVw

 दिमाग को रखना हो चुस्त-दुरुस्त तो पढ़ें हिंदी


                                         अनेक शोध से अब यह प्रमाणित हो चुका है कि  हिन्दी की लिपि देवनागरी, दुनिया की अन्य भाषाओँ व लिपियों की तुलना में सर्वश्रेष्ठ है। हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी में मात्रा और अक्षर घुमावदार होते हैं, जिसे ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं पढ़ना पड़ता है। ऐसा करने से वह दिमाग के दोनों हिस्सों को सक्रिय रखती है, जबकि अंग्रेजी भाषा की लिपि रोमन को एक ही दिशा में पढ़ना होता है, जो दिमाग के सिर्फ बाएं हिस्से को सक्रिय रखता है।
                                         शोधकर्ताओं के मुताबिक अंग्रेजी की तुलना में हिन्दी  भाषा बोलने से दिमाग अधिक सक्रिय रहता है, इसलिए दिमाग को चुस्त दुरुस्त रखना हो तो हिन्दी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करें और आवश्यकता हो तभी अंग्रेजी में बात करें।
                                         अपने मस्तिष्क को चुस्त दुरुस्त व सक्रिय बनाए रखना है तो हिन्दी  में लिखे, हिन्दी में वार्तालाप करें। अब तो इंटरनेट पर हिंदी में सैकड़ों ब्लॉग और वेबसाइट संचालित हैं इन्हें नियमित रूप से पढ़ने की आदत डालें। स्मार्टफोन में भी हिन्दी में लिखने के अनेक टूल्स (ऐप) उपलब्ध हैं, इनका प्रयोग अवश्य करें।