Halloween party ideas 2015

World No Tobbaco Day (31 May) : 
विश्व तंबाकू निषेध दिवस विशेष  (31 मई) : 
क्या आप जानते हैं तंबाकू से जुड़े ये भयावह खतरे -


-- तंबाकू से 25 से अधिक बीमारियां होती है, इनमें कई प्रकार के कैंसर, फेफडों की बीमारियां और टीबी प्रमुख है।

-- 90 प्रतिशत फेफड़े का कैंसर, 90 प्रतिशत मुंह का कैंसर और 77 प्रतिशत नली का कैंसर धुम्रपान सेवन करने से होता है।

-- धुम्रपान से आयु कम होती है। रोजाना 10 सिगरेट पीने वाले की आयु 30 प्रतिशत और 20 से अधिक सिगरेट पीने वालों की आयु सामान्य की तुलना में 50 फीसदी कम होती है।

-- धुम्रपान मानव प्रजनन के सभी पहलुओं को नुकसान पहुंचाता है और महिलाओं की गर्भधारण क्षमता में लगभग 40 प्रतिशत कमी ला देता है। गर्भ के दौरान धुम्रपान करने वाली महिलाओं में शिशु के वजन में कमी होने और गर्भपात व भ्रूण में विकृति आने की आशंका तीन गुनी बढ़ जाती है।

-- धुम्रपान की लत के शिकार औसतन 50 फीसदी लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है। जिन लोगों की मौत होती है उनमें 50 फीसदी लोगों की उम्र 35 से 69 वर्ष होती है।

-- धुम्रपान से हृदय रोग की आशंका बढ़ जाती है। वर्तमान में 30 फीसदी युवा जो स्मोकिंग करते हैं, हार्ट पेशेंट हैं। ऐसे मरीजों की मृत्यु दर लगातार बढ़ रही है।

-- सिगरेट के धुंए मात्र से स्मोकिंग नहीं करने वालों को भी 30 फीसदी फेफड़ों के कैंसर का खतरा होता है।

-- सिगरेट के धुएं में अनेक घातक रासायनिक तत्व पाए जाते हैं, जैसे टार, निकोटिन, कार्बन मोनोऑक्साइड, निकल, जस्ता, नाइट्रोजन हाइड्रोजन क्लोराइड तथा अनेक विषैले रासायनिक पदार्थ जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होते हैं।

➤ उमेश कुमार साहू 

माँ पर हृदयस्पर्शी कविता : नमन तुम्हें बारंबार है माँ 
Mother's Day Very Heart Touching Poem in Hindi






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ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है माँ



                                      'माँ' एक छोटा सा शब्द, लेकिन प्रेम, वात्सल्य और सृजन की ऐसी कृति जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड समाहित है। एक मां ही है जो सबका स्थान ले सकती है लेकिन उसका स्थान कोई नहीं ले सकता। अपनी जान जोखिम में डालकर मां बच्चे को जन्म देती है, ऐसा त्याग एक मां ही कर सकती है। मां हम सबकी ताकत, ऊर्जा और प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है।
                                       कभी शिक्षक के रूप में तो कभी संरक्षक के रूप में मां का हर स्वरूप महान है। बचपन में जब हम ठोकर खाकर गिर जाते हैं, रोने लगते हैं तब आंसुओं में मां की ही प्रतिबिंब दिखाई पड़ती है। जीवन के हर छोटे-बड़े संघर्ष में, हर विषम परिस्थिति में मां छायादार वृक्ष की भांति हर ताप चुपचाप सह लेती है। दुनिया बदल जाती है लेकिन मां कभी नहीं बदलती। हर रूप में उसकी शख्सियत विराट है।
                                        सृष्टि के प्रारंभ से लेकर अब तक मां की असीम क्षमताओं एवं सृजन की हजारों गाथाएं इतिहास के पन्नों पर अंकित है। इतिहास गवाह है मां के त्याग, साहस, प्रेम और करुणा की बदौलत ही मानवीय सभ्यता ने विकास की नित नवीन सीढियां चढ़ी है। 
                                          वर्तमान समय में मां का स्वरूप बदला है पर मां की ममता और मातृत्व भाव आज भी निश्छल व पवित्र है। आज मां घर की चहारदीवारी से बाहर निकलकर घर की जिम्मेदारियों से लेकर पारिवारिक, सामाजिक व आर्थिक दायित्वों के निर्वहन में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। हमारे पालन-पोषण एवं हर दुःख-तकलीफ में मां से मिला अपनत्व और स्वार्थरहित सहारा दुनिया की किसी भी चीज से नहीं तौला जा सकता। कितनी अजीब बात है हम बच्चे से बड़े हो जाते हैं लेकिन मां के लिए हम हमेशा बच्चा ही रहते हैं।
                                            आइए प्रण लें मां की हर दुःख-दर्द को हर लेने का, उसकी सम्मान और सुरक्षा का, उसका दिल कभी नहीं दुखाने का। याद रखें मां से ही हमारा अस्तित्व है, उसके आशीर्वाद से ही हमारा सुखद जीवन संभव है। माँ के आंचल की शीतल छांव में हर समस्याओं का अंत है। 
ईश्वर भी जिसका ऋणी है ऐसी मां को शत-शत नमन।
                                                                                उमेश कुमार साहू 

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                                                  https://youtu.be/XeeQOGD_Bss