क्यों टूटते हैं तारे ?



                                 आपने रात में तारे टूटते जरूर देखा होगा और फिर आंखें बंद कर कोई मुराद भी मांगी होगी। दरअसल आसमान से नीचे गिरती हुई चमकदार चीज तारा नहीं होकर, उल्काएं होती हैं। 
                                ये उल्काएं सुई की नोक से लेकर कई किलो वजनी होती हैं। इन्हें बिना किसी उपकरण की मदद से भी अंधेरी रात में देखा जा सकता है। जब इन उल्काओं की सतह और वायु के बीच का घर्षण ऊर्जा उत्पादित करता है, तब ये उल्काएं पृथ्वी की तरफ बढ़ने लगती है और इस ऊर्जा और पृथ्वी के वातावरण के कारण छोटे आकार की उल्काएं जलने लगती हैं। इस कारण तेज रोशनी दिखती है और लगता है जैसे कोई चमकदार तारा आसमान से टूटकर जमीन की तरफ बढ़ रहा है।
                                खगोल शास्त्रियों ने पाया कि उल्काएं समूह में ही रहती हैं। जब छोटी उल्काएं तारे की तरह टूट कर गिरती नजर आती हैं, तब बड़ी उल्काएं भी पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करती हैं। ये बड़ी उल्काएं जब पृथ्वी की सतह पर गुरुत्वाकर्षण के कारण आ गिरती हैं, तब उन्हें उल्कापिंड कहा जाता है। बहुत सारे उल्कापिंड बिना नष्ट हुए पृथ्वी पर एक साथ गिरते हैं, तो उसे उल्कापात कहते हैं।

➤ उमेश कुमार