Halloween party ideas 2015


होली के रं - प्रकृति के संग                                 
                                        होली में लगाये जाने वाले विभिन्न रंग आकर्षक तो लगते ही हैं, अगर इन्हें घर पर ही बनाया जाये तो ये स्वास्थ्य और त्वचा के लिए फायदेमंद भी हो सकते हैं।                                
तो आइये इस बार बनाएं घर पर ही बनाएं होली के आकर्षक रंग -

पीला रंग - हल्दी पाउडर को बेसन, मैदा या आटे में मिलाएं। इसके अलावा अमलतास या गेंदे के फूलों की पंखुड़ियों को धूप में सुखाएं और बारीक पीस लें। अब इन्हें बेसन में मिला लें। यदि आपको रंग बिलकुल पीला ही चाहिए तो एक चम्मच हल्दी को दो लीटर पानी में घोलकर अच्छी तरह उबाल लें ताकि रंग पक्का हो जाए।

लाल रंग - लाल चंदन से बनता है अत्यंत सुंदर लाल चटकदार रंग। यह त्वचा के लिए भी लाभकारी है। यदि गीला रंग बनाना है तो दो चम्मच लाल चंदन पाउडर को एक लीटर पानी में उबालकर छान लें। लाल अनार का छिलका पानी में उबाल लें। इससे भी बढ़िया लाल रंग मिलेगा।

हरा रंग - हरे रंग के लिए मेंहदी का इस्तेमाल कर सकते हैं। गुलमोहर की पत्तियों को सुखाकर पाउडर भी बना सकते हैं। यदि गीला रंग बनाना है तो दो चम्मच मेंहदी एक लीटर पानी में घोल लें। इसके अतिरिक्त पालक, धनिया या पुदीने की पत्तियां पीसकर पानी में घोल लें। हो गया।

काला रंग - आंवले के सूखे फलों को रात भर लोहे के बर्तन में भिगो दें। सुबह छान लें और जी भरकर खेलें। आप काले अंगूरों का रस भी प्रयोग कर सकते हैं।

भूरा रंग - भूरे रंग के लिए कत्थे को पानी में घोल लें या चाय अथवा काफी में से कोई भी पानी में उबालकर भूरा रंग बनाएं और जी भरकर खेलें होली।                                                                                                                                                                                                     रोशनी साहू


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस  पर विशेष लेख रचना 
International Women's Day Article in Hindi
महिला दिवस पर  हिंदी कोट्स एवं  संदेश 
Women's Day Hindi Quotes and Messages

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के सुअवसर पर नारी को समर्पित कविता : सूखी नदी





सूखी नदी

''जब मैं सागर थी
तब
समाहित होती थी
सैकडों जलधाराएँ
मुझमें आकर,
क्रीड़ाएं करते थे
असंख्य लहरें
मेरी आँचल के
हर छोर पर,
मेरा ही अंश लेकर
इठलाते थे मेघ
ऊँचे आकाश पर,
श्रृंगार करते थे
सूरज-चाँद-सितारे
मुझमें अपना
प्रतिबिम्ब निहारकर,
मेरे विस्तार की
सराहना होती थी
सर्वत्र,
पर अब
मै सागर नहीं रही
अब मैं
सूखी नदी हो गयी हूँ
जहां पर
दृष्टि नहीं जाती है
किसी की...''
     -- रोशनी साहू 


दोस्तों 'सफलता सूत्र ' के  हमारे  यूट्यूब चैनेल 'सफलता सूत्र  Safalta Sutra' पर  महिला दिवस की उक्त कविता  व अन्य ज्ञानवर्धक, उपयोगी, रोचक विडियो अवश्य देखें :-