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नववर्ष के ये संकल्प आपको क्षमतावान, योग्य और श्रेष्ठ बनाने में मददगार सिद्ध होगी...


                                        नववर्ष का एक और शानदार उपहार हमारे जीवन को पुनः नव उमंग-उल्लास, नई ताजगी से भरकर नव सकारात्मक विचारों, नव संकल्पों एवं नव लक्ष्यों की दिशा में कदम बढ़ाने का। आइये इन नवीन बेशकीमती पलों के साथ संकल्प लें मन, वचन, कर्म से स्वस्थ, सुखी और समृद्धशाली बनने का।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।।  

सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग - यदि आप अच्छाई की दिशा में आगे बढ़कर कार्य कर रहे हैं तो इस बात पर बिल्कुल भी ध्यान न दें कि लोग क्या सोचेंगे। किसी भी कार्य से हम छोटा या बड़ा नहीं हो जाते। अपनी-अपनी जगह में हर कार्य और इंसान का महत्व है, इसलिए मन लगाकर अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर कार्य करें, सफलता आपकी कदम चूमेगी और आप हमेशा खुश रहेंगे।

अहंकार का विसर्जन - खुद को दूसरों से श्रेष्ठ समझना अहंकार है। असफलता, असंतुष्टि और दुखमय जीवन का कारण हमारा अहंकार भी है। अहंकार से क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, घृणा आदि मानसिक दोष उत्पन्न होते है। अहंकार हमारे सोचने समझने की क्षमता को नष्ट कर देता है। इसलिए अहंकार त्यागें और सफलता एवं खुशियों का द्वार खोलें।

कुसंगति एवं नशा से बचें - इन दिनों विविध नशाओं का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। यह सब कुसंगति का परिणाम है। नशा तन और मन को धीरे धीरे वैसे ही नष्ट कर देती है जैसे कागज को दीमक चाट जाता है। दो घड़ी की मौज-मस्ती के लिए ईश्वर की बनाई सर्वश्रेष्ठ कृति इस शरीर व्यर्थ बीमार एवं नष्ट न करें, बल्कि शरीर को स्वस्थ व मजबूत बनाने का हमेशा प्रयास करें।      

तुलना एवं प्रतिस्पर्धा से बचें - जिस प्रकार दो व्यक्ति की उंगलियों के फिंगर प्रिंट एक समान नहीं हो सकते, उसी प्रकार किन्हीं दो व्यक्ति की आर्थिक, सामाजिक एवं व्यक्तिगत परिस्थितियां कभी भी एक जैसी नहीं हो सकती। इसलिए किसी से तुलना या प्रतिस्पर्धा करना छोड़ें। स्वयं के आत्मविकास में लगे रहें। एक-एक पल का सदुपयोग करते हुई स्वयं के उत्थान के लिए उस दिशा में आगे बढ़ें जो आपको मंजिल तक ले जाए।     

जीवन का सार्थक उद्देश्य बनाएं - जीवन का उद्देश्य सिर्फ धन कमाना, भौतिक सुख-साधन जुटाना एवं जीवन व्यतीत करना भर नहीं है। जीवन व्यतीत तो पशु-पक्षी भी कर अच्छे से कर लेते हैं। बात तो तब है जब हम स्वयं के लिए, परिवार के लिए, समाज के लिए और देश के लिए पूर्ण जिम्मेदारी  के साथ श्रेष्ठ, ईमानदार इंसान बनकर कुछ ऐसा उद्देश्य लेकर चलें जो सबके लिए हितकारी, सुखकारी और कल्याणकारी हो.
                  
निश्चित रूप से नववर्ष के ये संकल्प आपको क्षमतावान, योग्य और श्रेष्ठ बनाने में मददगार सिद्ध होगी।
-- उमेश कुमार


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नववर्ष विशेष
NEW YEAR ARTICLE IN HINDI



समय ही संपदा है                                                   
                                                      नववर्ष के रूप में हम सभी को फिर से 365 दिनों का बेशकीमती उपहार मिल गया है। अमीर हो या गरीब, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, अफसर हो या श्रमिक, प्रकृति का यह अनमोल तोहफा (समय) सभी को एक समान मिला हुआ है। फिर क्या कारण है कि इतने ही समय में कुछ लोग अपने ढ़ेरों काम निपटाकर बहुत आगे निकल जाते हैं, वहीं कुछ लोग समय का रोना रोते हुए वहीं के वहीं हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। इसका बड़ा कारण है समय प्रबंधन का अभाव।
                                                   यूं तो समय अथाह है अनंत है, लेकिन हमारी जीवन अवधि सीमित। हम समय नहीं बिताते, समय हमें बिता देता है। जो व्यक्ति इस बीत रहे समय की कीमत जानता है, वह कभी भी समय को व्यर्थ बर्बाद नहीं करता। वह जानता है " समय ही धन है।" और हर पल के सदुपयोग में ही इस जीवन की सार्थकता है। जिनको समय प्रबंधन की कला आती है, वे हर समय इसी दिशा में प्रयासरत रहते हैं कि किस कार्य को कब और कैसे किया जाए जिससे सही समय पर सार्थक व सफल परिणाम प्राप्त हो सके।
                                                     कुछ लोगों को अक्सर यह कहते सुना जा सकता है कि, क्या करें समय नहीं मिलता, अति व्यस्तता चल रही है, जबकि ऐसा नहीं है, हर वक्त व्यस्त रहकर भी समय का सदुपयोग संभव है। कुछ लोग अतिव्यस्त रहकर भी कुछ विशेष सफलता प्राप्त नहीं कर पाते, वहीं कुछ लोग उतने ही समय में उससे दुगुनी मात्रा में काम कर सफलता के शिखर पर पहुंच जाते हैं। गौरतलब है की यह सब संभव है, योजना बनाकर कार्य के क्रियान्वयन में और प्रतिपल सजग रहने में।
                                                      आज जीवन के हर क्षेत्र में समय के साथ नॉलेज अपडेशन और व्यक्तित्व विकास का महत्व बढ़ता जा रहा है, ऐसे में यदि आप खुद को पिछड़ता हुआ महसूस कर रहे हैं तो आवश्यकता इस बात की है कि समय के मामले में सचेत रहें। हर चीजों का योजना बनाकर चलें। समय के हिसाब से कार्ययोजना बनाकर उसे वैसे ही निपटाएं। अपनी पसंद और प्रकृति के अनुसार समय निर्धारण करें। 
अंत में नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ ध्यान रखें 'समय ही संपदा है.' यदि आप समय को महत्व देंगे तो समय आपको महत्व देगा।
-- उमेश कुमार

नए साल की कविता 
NEW YEAR HINDI POEM 



...नए साल में 
सच हो जाये सबके सपने नये साल में 
बेगाने बन जाये अपने नये साल में, 

दिल को दिल का मिले सहारा नये साल में 
बहे प्रेम की अविरल धारा नये साल में, 

हर मुखड़े पर मुस्कान खिले नये साल में 
हर जुबां को सुन्दर गान मिले नये साल में, 

सर्वत्र उठे सदभाव की लहरें नये साल में 
सारे दुर्भाव-विकार मरें नये साल में, 

सुख- दुःख बाटें सभी परस्पर नये साल में 
जाति-धर्म का रहे न अंतर नये साल में, 

विकसित हो तन-मन और जीवन नये साल में 
सुख शांति रहे धरा-गगन में नये साल में.

-- उमेश कुमार 

पर्व विशेष : क्रिसमस (25 दिसंबर) के अवसर पर
Cristmas Day Celebration (25 December) 
क्रिसमस की धूम सर्वत्र  


                                              क्रिसमस ईसाईयों का सबसे बड़ा त्यौहार है। यह ईसा मसीह के जन्म का उत्सव है, जो प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। लगभग दो हजार साल पहले इसी दिन ईसा मसीह का जन्म हुआ था। ईसा का जन्मदिन मनाने का प्रारंभ उसकी मौत के बाद करीब सन चार सौ से शुरू हुई थी। क्रिसमस का अर्थ होता है ईसा मसीह की प्रार्थना-सभा।
इस तरह हुआ यीशु का जन्म 
                                             प्रभु ईसा मसीह का जन्म येरुशलम के पास बेथलेहम (इजराइल) में एक गौशाला में हुआ था। नाजरथ नामक एक शहर में परमेश्वर का भेजा देवदूत मरियम नाम की कुंवारी लड़की के पास पहुंचा और उसे प्रभु यीशु के धरती पर अवतरण की सूचना दी। दैवीय आज्ञा के अनुसार मरियम को गर्भवती होना था और अपने मंगेतर जोजफ (यूसुफ) के साथ भागकर बेथलेहम जाना था उन दिनों इजरायल पर अत्याचारी रोमनों का राज था। दैवीय आज्ञा से अवगत रोमन सम्राट राज्य में जन्में हर नवजात शिशु की हत्या पर उतारू था। लिहाजा मरियम अपनी कोख में पल रहे शिशु को लेकर बेथलेहम पहुंची, पर वहां भी कहीं आश्रय न मिलने की वजह से विवश होकर उन्हें एक गौशाला में शरण लेनी पड़ी और प्रभु यीशु का जन्म हुआ।
क्रिसमस की धूम सर्वत्र 
                                               क्रिसमस का उल्लास इसे मनाने वालों के चेहरे पर तो झलकता ही है, साथ ही उतना ही उत्साह इस पवित्र धार्मिक पर्व को मनाने के तौर-तरीकों में नजर आता है। घरों की आकर्षक सजावट, क्रिसमस ट्री और रोशनी में जगमगाता सितारा, जो कि सभी को प्रभु ईसा मसीह के उपदेशों पर चलने की प्रेरणा देती है। क्रिसमस की पूर्व रात्रि यानी 24 दिसंबर को रात साढ़े दस बजे से चर्च में विशेष प्रार्थना व कैरल्स का आयोजन होने लगता है। फिर क्रिसमस मास (विशेष प्रार्थना) व मिडनाइट मास होता है। इसके बाद चर्च के फादर श्रद्धालुओं को प्रसाद देते हैं। प्रार्थना सभा के बाद सभी एक दूसरे को बधाईयां देते हैं। दूसरे दिन सुबह लोग अपने रिश्तेदारों, परिचितों को क्रिसमस केक व मिठाइयां खिलाते हैं। उपहारों का आदान-प्रदान होता है। आतिशबाजी की जाती है और बच्चों को सांता क्लॉज़ ढ़ेर सारे उपहार बांटते हैं।
-- उमेश कुमार साहू

र्ष विशेष : 
नववर्ष 2017 : साल दर साल, कितने सफल कितने असफल 


                                         चंद दिनों बाद दीवार की खूंटी से उतारकर यादों की खूंटी में एक और साल टांग दी जाएगी। साल का अंत न सिर्फ नववर्ष की तैयारी का होता है अपितु आत्मविश्लेषण का भी होता है। नववर्ष के प्रारंभ के साथ हमारे द्वारा बनाई गई योजनाओं की पूर्णता में आखिर हम कितने सफल हुए। कितनी योजनाएं बीच में छोड़ दी गई और कितनी भुला दी गई।आखिर कारण क्या रहा? जरा गंभीरता से सोचें। साल-दर-साल हम ढेरों योजनाएं बनाते हैं, लेकिन विभिन्न कारणों से अधिकांश योजनाएं पटरी से उतर जाती है। आइये जानें किन कारणों से हमारी योजनाएं सफल नहीं हो पाती।
योजनाबद्ध कार्य निर्धारण का अभाव - मान लीजिए आपने इस नववर्ष में 1 लाख बचत करने की योजना बनाई, लेकिन इसके लिए आपने न तो अपने आय-व्यय का लेखा-जोखा तैयार किया और न ही सही इन्वेस्टमेंट की ओर ध्यान दिया। निश्चित रूप से साल के आखिर तक आपका लक्ष्य अधूरा रह जाएगा। इसलिए यदि आप किसी भी लक्ष्य को पाना चाहते हैं पूरी योजनाबद्ध तरीके से काम से लेकर परिणाम तक का समुचित ढंग से निर्धारण करें।
अव्यवस्था एवं अति व्यस्तता  - साल की शुरुआत में हम एक साथ ढ़ेर सारी योजनाएं बना लेते हैं और धीरे धीरे यह अव्यवस्था एवं अति व्यस्तता की भेंट चढ़ जाता है। याद रखें भले ही आप साल में एक लक्ष्य बनाएं , लेकिन उसे मजबूत आधार देकर धैर्य, लगन और मेहनत के साथ पूरा करें। ऐसी उपलब्धि निश्चित रूप से टिकाऊ होगी।
सकारात्मकता की कमी - सफल व्यक्ति कुछ अलग काम नहीं करते, बल्कि वे हर काम को अलग ढंग से करते हैं। हम अक्सर अपनी नकारात्मक सोच के कारण असफल होते हैं। कहते हैं इंसान जैसा सोचता है वैसा बन जाता है। निश्चित रूप से यदि साल भर हम सकारात्मक विचारों और कार्यों से परिपूर्ण रहेंगे तो सफलता हमारी कदम चूमेगी।
मेहनत के बदले शॉर्टकट का फेर - याद रखिए एक सफल, सार्थक और समृद्ध जीवन निरंतर प्रयास करने से मिलता है। बड़ी उपलब्धियों को पाने का कोई शार्टकट नहीं होता। अचानक बिना मेहनत के धनवान या बहुत ऊंचाई में पहुंचने के फेर में न रहें, क्योंकि ऐसी ऊंचाई से गिरने में ज्यादा देर नहीं लगती। मेहनत व ईमानदारी से कमाया हुआ धन या उपलब्धियां ही फलदायी होती है।
सफलता की राह में हमारे ही बनाए रुकावटें - हमारी सफलता की राह में रोड़े हमारी अव्यवस्थित दिनचर्या, बेतरतीब घर-ऑफिस, कर्ज, अस्वस्थ तन-मन, फिजूल भागदौड़, तनाव आदि होते है। ये सभी हमारी स्वाभाविक शक्ति व रचनात्मक सोच को कम करते हैं। इनसे निजात पाने के लिए अपने हर पल को व्यवस्थित एवं टाइम टेबल के अनुरूप बनाकर रखें।
                                        आइए इस नववर्ष पुनः नए सिरे से जीवन की शुरुआत करें, इस शानदार अवसर पर शानदार संकल्प लें। अपने बहुमूल्य समय को श्रेष्ठता के प्रति समर्पित कर जीवन को नए रूप-रंग से संवारें। तमाम बुराइयों को तिलांजलि देकर अच्छाइयों को अपनाकर जीवन को नए अंदाज में जीने का संकल्प लें।
-- उमेश कुमार साहू