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पर्व विशेष : दीपावली      
DIWALI ARTICLE IN HINDI 


शुभ संकल्पों का उजास बिखेरें 
दीपावली कुविचारों और दुर्भावों को तिलांजलि देकर नवसंकल्प लेने का पर्व है। अंतर्मन में सदविचारों, सुकर्मों का दीप सदा दैदीप्यमान रहे ऐसी कामना हर जन में होनी चाहिए। आइए इस दीपपर्व पर हम दिखावे से दूर, सादगी से परंपराओं का निर्वाह करते हुए नवसंकल्पों का दीप प्रज्वलित कर दीपावली के शुभ संदेशों को जीवन में उतारें और पर्व को सार्थक बनाएं।     
बुराइयों का सफाया करें
दीपावली के आगमन के साथ प्रारंभ होता है घर-आंगन की साफ-सफाई । सभी चाहते हैं कि उनका घर व आसपास गंदगी मुक्त हो जाए, लेकिन कितना अच्छा हो यदि हम इस गंदगी के साथ ही अपनी मानसिक गंदगी का भी सफाया करें, यानि मन में व्याप्त नकारात्मक विचार, संकुचित दृष्टिकोण, निजी स्वार्थ, आलस्य, उन्माद, आक्रोश, अहंकार, घृणा, द्वेष, लालच आदि दुर्भावों को निकाल फेंके। इनकी जगह सकारात्मक सोच, नवीन रचनात्मकता, धैर्य, विवेक, साहस, प्रेम, सौहार्द्र, दया, करुणा आदि सद्भावों को जीवन में शामिल करें, तो निश्चित रूप से व्यक्तित्व तो निखरेगा ही सफलता का ऐसा उजास फैलेगा कि हर दिन दीपावली होगी।            
उचित और न्यायपूर्ण तरीके से धन कमाएं   
दुनिया में आज धन को ही सब कुछ मान लिया गया है। तमाम सुख-सुविधा, आराम के पीछे धन का हाथ है। धन के बिना जीवन की गाड़ी नहीं चल सकती। लेकिन यदि धन ही सब कुछ होता तो दुनिया में सबसे ज्यादा सुखी धनवान ही होते जबकि ऐसा है नहीं। धन-संपन्न बनिए, लेकिन निरंतर आवश्यक व उचित प्रयत्न करके। अनुचित और अन्यायपूर्ण तरीके से कभी धन प्राप्त करने का प्रयास नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा धन टिकाऊ और शुभ फल देने वाली नहीं होती।               
एक दीप इनके लिए भी जलाएं 
हमारे आसपास न जाने ऐसे कितने लोग हैं जिनका अपना कोई नहीं, जो अभावग्रस्त हैं, जिनके जीवन में अँधेरा है गरीबी और अशिक्षा का। क्या हमारा दायित्व नहीं बनता कि हम उनके जीवन को खुशियों की रोशनी से आलोकित करें। दीपपर्व पर अपने बजट के अनुरूप गरीब बच्चों को मिठाइयां, फल, कपड़े व किताबें आदि खरीदकर जरूर दें। अनाथ आश्रम एवं वृद्धाश्रम जाकर उनकी जरूरत की चीजें भेंट करें। अपनों के लिए तो सब करते हैं लेकिन औरों को देने का आनंद ही अलग है। जब आप इस प्रकाशोत्सव के मौके पर इनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखेंगे, तब आपकी खुशियां भी दोगुनी हो जाएंगी।                             
उजास की आराधना करें, संघर्ष की साधना करें      
जीवन में कई बार ऐसी विषम परिस्थितियां आती हैं, जब सर्वत्र अँधेरे का साम्राज्य नजर आता है, कोई रास्ता सुझाई नहीं देता, जिंदगी अवसाद, निराशा, डर, नकारात्मकता के गहन अंधियारे में खोने लगता है, ऐसे में अपने भीतर नवीन आशाओं के दीप जलाएं, सकारात्मक सोच व अँधेरे से लड़ने का आत्मबल विकसित करें। दृढ़ संकल्पित हो दीप की भांति उजास की आराधना करें, संघर्ष की साधना करें। लौ की तरह ऊँचाई की ओर जाने का लक्ष्य रखें यही हमारी प्रगति और उजाले की ओर बढ़ने का आधार है।      
-- उमेश कुमार साहू 

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