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DUSSEHRA ARTICLE IN HINDI
विजयादशमी की हार्दिक शुभ कामनाएं  


आतंक के रावण से मुक्ति की आवश्यकता 

          समय के प्रवाह में जाने कितनी सदियां बह गई, लेकिन बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य यानि रावण पर राम की विजय का महापर्व आज भी हमारे समाज में पूरी श्रद्धा और आकर्षण के साथ रचा-बसा है। भगवान राम ने सच्चाई और साहस के बल पर असत्य, पाखंड और दुराचार के रावण का विनाश किया था। यह कालजयी घटना हमारी आत्मा की गहराइयों में आज भी जीवित है।
                   विजयादशमी आत्मबल प्राप्त करने का पर्व है, आत्मबल से विजय अवश्यंभावी है। आत्मबल के लिए शक्ति का साथ आवश्यक है और उपासना एवं शारीरिक दृष्टि से पुष्ट होने के लिए शरद ऋतु महत्वपूर्ण है। शरद ऋतु के शुक्ल पक्ष की यह दशमी विजय का उल्लास लेकर हमारे जीवन में उतरती है। राम की विजय और शक्ति साधना पूरी होने की तिथि एक ही है। राम ने नवरात्रि में शक्ति की आराधना की तब जाकर दसवें दिन रावण का संहार कर सके। जब कल्याण असत्य के पक्ष में हो जाएगा तो सत्य और शक्ति के सामने उसे झुकना ही पड़ेगा। जीवन में दुष्प्रवृत्तियों के विनाश के लिए सत्य को शक्ति की आराधना करनी होगी।
                   विजयादशमी आसुरी और राक्षसी प्रवृत्तियों से लड़कर इसे समाप्त करके मानवता को इससे मुक्ति दिलाने का पर्व है। संसार में जब भी आसुरी प्रवृत्तियों ने सिर उठाया देर सबेर उसका सर्वनाश ही हुआ है। आज का सबसे भयानक रावण आतंकवाद मानव जाति पर फिर कहर ढा रही है। इस रावण के कई सिर हैं। लेकिन हमारा गौरवशाली इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी आतंकवाद ने किसी भी रूप में सिर उठाया है, निश्चित रूप से उसका अंत हुआ है। बुराइयों का अंत अवश्यंभावी है। जब सत्य अपनी पूरी शक्ति के साथ प्रकट होता है, तो असत्य की सारी रुकावटें ध्वस्त हो जाती हैं। 
--उमेश कुमार साहू 

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