Halloween party ideas 2015

SHRI KRISHNA JANMASHTAMI : GEETASAR


गीता का केंद्रीय भाव है कि निरंतर कर्म करते रहो, परंतु उसमें आसक्त मत रहो। संस्कार प्राय: मनुष्य की जन्मजात प्रवृत्ति होता है। यदि मन को तालाब मान लिया जाए तो उसमें उठने वाली प्रत्येक लहर, प्रत्येक तरंग जब शांत हो जाती है तब वास्तव में वह नष्ट नहीं होती, वरन चित्त में एक प्रकार का चिह्न छोड़ जाती है। यह तरंग ऐसी संभावना का निर्णय कर जाती है, जिससे वह फिर उठ सके। इस चिह्न तथा इस लहर के फिर से उठने की संभावना को हम संस्कार कह सकते हैं। मैं जो कुछ भी हूं, वह मेरे अतीत के संस्कारों का प्रभाव है। वास्तव में इसे ही चरित्र कहते हैं और प्रत्येक मनुष्य का चरित्र इन संस्कारों के द्वारा ही निर्धारित होता है। शुभ संस्कार प्रबल रहे तो मनुष्य का चरित्र अच्छा होता है और यदि अशुभ संस्कार प्रबल रहे तो बुरा। एक मनुष्य निरंतर बुरे शब्द सुनता रहे, बुरे विचार सोचता रहे, बुरे कर्म करता रहे तो उसका मन भी बुरे संस्कारों से पूर्ण हो जाएगा। हम देखते हैं कि हम जिस किसी कर्म में लिप्त होते हैं, उसका संस्कार हमारे मन में रह जाता है। मैं दिन भर में सैकड़ों आदमियों से मिला। उनमें एक ऐसा व्यक्ति भी है, जिससे मुझे प्रेम है। यदि सोते समय मैं उन सभी का स्मरण करने का प्रयत्न करूं तो मेरे सामने केवल उसी व्यक्ति का चेहरा आएगा, जिसे मैं प्रेम करता हूं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस व्यक्ति के प्रति मेरी आसक्ति ने अन्य सभी की अपेक्षा मेरे मन पर गहरा प्रभाव डाल दिया था। 
गीता का सार है -
अनासक्त रहो, कार्य होते रहने दो।
निरंतर कार्य करते रहो, परंतु एक लहर को भी अपने मन पर प्रभाव मत डालने दो।
-- स्वामी विवेकानंद 


                                            रक्षाबंधन का पावन पर्व भारतीय संस्कृति में बहन और भाई के प्रेम प्रतीक के रूप में शुचितापूर्ण मर्यादाओं को जीवंत करता है। रक्षाबंधन में निहितार्थ यह है कि पारस्परिक प्रेम के बंधनों से रक्षा होती है। पवित्र प्रेम व स्नेह सूत्र में बांधने की यह परंपरा बहुत ही पवित्र, मर्मस्पर्शी, भावभीनी व श्रद्धा से परिपूर्ण है।
                                           नारी के अधिकारों की रक्षा का पवित्र संकल्प ही रक्षाबंधन है। अफसोस की बात है कि जिस समाज में रक्षाबंधन जैसा पवित्र पर्व हो, वहीं मूल्यों का निरंतर ह्रास हो रहा है, आज हमारी बहनें कहीं भी सुरक्षित नहीं है। समाज की अनेक कमजोरियों एवं बुराइयों ने उनका जीवन दूभर कर दिया है। कहीं उनकी आबरु लूटी जा रही है, तो कहीं उन्हें गर्भ में मारा जा रहा है। कहीं वह दहेज प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं, तो कहीं उन्हें वेश्यावृत्ति के दलदल में धकेला जा रहा है। और भी न जानें कितनी भीषण यातनाएं हैं जिन्हें चुपचाप बहनें झेलने को विवश हैं।
                                           आधुनिकता एवं इंटरनेट युग के पल-पल बदलते परिवेश में आत्ममुग्धता से बौराई नई पीढ़ी नैतिकता व मर्यादाओं को भूल रक्षाबंधन की आड़ में घर एवं समाज की आंख में धूल झोंक रहे हैं। राखी को महज मौज मस्ती का सामान समझ कर इस पवित्र बंधन को कलंकित कर रहे हैं। रक्षाबंधन का अर्थ केवल एक मिठाई का डिब्बा, कुछ उपहार या रुपए नहीं, इसके अलावा और भी बहुत कुछ है इन रेशमी धागों में। रक्षाबंधन स्नेहयुक्त बंधन है, इसके बदले में किसी उपहार की लालसा इसे एक औपचारिकता का रूप दे देती है।
                                              द्रौपदी ने कृष्ण जी की कटी उंगली पर अपनी चीर रक्षासूत्र के रूप में बांधा था, जिसके पवित्र संकल्प व पावनता को उन्होंने जीवन भर निभाया था। पवित्र भावों एवं संकल्पों से ओत प्रोत रक्षाबंधन का कच्चा धागा जंजीर से भी अधिक मजबूत एवं शक्तिशाली होता है। हम सभी भाई- बहन, परिवार, समाज का यह परम कर्तव्य होना चाहिए कि शुभ संकल्प लेते हुए इसकी पवित्रता को अक्षुण्ण रखें। किसी भी कीमत पर इसे कलंकित न होने दें। हर भाई अपनी बहन को इस बात का पूरा विश्वास दिलाए कि किसी भी विषम परिस्थिति में जब भी वह पीछे मुड़कर देखेगी तो हमेशा उसका भाई उसे संभालने तैयार खड़ा मिलेगा।


-- उमेश कुमार 


INDEPENDENCE DAY SPECIAL 
कब मिलेगी इनसे जादी



                                        70 साल हो गए हमारी जादी को। इतने सालों में क्या सचमुच हमारी गुलामी की जंजीरें टूटी है? क्या हम पराधीनता की वेदना से मुक्त हो आजाद हैं? शायद नहीं ! आज भी हम गुलाम हैं मंहगाई के, गुलाम हैं भ्रष्टाचार के ! भयंकर अट्टहास करते रावण के ये दस सिर यानि गुलामी के के दस चेहरे जिनसे हमें आजाद होना अभी बाकि है।
गरीबी - आजादी के 70 साल बाद भी गरीबी हमारे लिए अभिशाप बना हुआ है। योजनाबद्ध विकास कार्यक्रमों व असीमित धन के आबंटन के बाद भी गरीबी दूर नहीं की जा सकी।
बेरोजगारी - हर साल रोजगार की तलाश में हजारों लोगों का गांव से शहर की ओर पलायन हमारी आजादी को आंखें दिखाने के लिए काफी है। साल दर साल पढ़े-लिखे बेरोजगारों की तैयार होती फ़ौज एक गंभीर चुनौती है।
मंहगाई - सुरसा की भांति निरंतर मुंह फैलाती मंहगाई मध्यम व निम्न वर्ग के लिए आजादी को ठेंगा दिखाने जैसा है। बढ़ती मंहगाई रूपी गुलामी से आजादी आमजन की प्रथम आवश्यकता है।
आतंकवाद - आज आतंकवाद समूचे विश्व व इंसानियत के लिए सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरी है। आतंकवाद फिर से हमें गुलाम बनाने को आतुर है। सरकार को चाहिए आतंकवाद के विरुद्ध कड़ा से कड़ा कदम उठाए। हमें भी देश में अमन व शांति के लिए अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे।
साम्प्रदायिकता - यह मानवता को धीरे-धीरे खाने वाला घुन है। अंग्रेजों द्वारा बोया गया साम्प्रदायिकता के बीज आज वृक्ष बनकर फल-फूल रहा है जो कि राष्ट्र की एकता व प्रगति में सबसे बड़ी बाधा है। धर्म व सम्प्रदाय के नाम पर अपना स्वार्थ साधने वाले राजनीतिक दलों एवं धर्मगुरुओं से स्वयं को आजाद रखने की आवश्यकता है।
आरक्षण - आरक्षण का मुख्य उद्देश्य सामाजिक, शैक्षिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को ऊपर उठाने का था, लेकिन आज यह वोटबैंक की राजनीति तक सिमट कर रह गई है। आरक्षण का वास्तविक लाभ जिनको मिलना चाहिए उन्हें नहीं मिला, बल्कि कुछ प्रभावी जातियों ने अपने राजनीतिक प्रतिनिधित्व की आड़ में इसका जमकर लाभ उठाया।
भ्रष्टाचार - इस शब्द से शायद ही कोई अनजान हो। यह आज राष्ट्र का कोढ़ बन चुका है। सभी इससे त्रस्त हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरुआत स्वयं से करनी होगी। न तो घूस देंगे और न ही लेंगे, इस मूलमंत्र को व्यवहार में लाना होगा।
दुष्कर्म - इसका ग्राफ दिनोंदिन बढ़ता ही जा रहा है। मानों किसी के दिल में सजा का खौफ ही न बचा हो। बच्चों और महिलाओं पर हो रहे घिनौने दुष्कर्म के खिलाफ़ आखिर कब बनेगा कठोर कानून। 
भूखमरी - सरकारी गोदामों में टनों अनाज हर साल सड़ जाता है और लोग भूख से मर रहे होते हैं। किसान आत्महत्या करने विवश है। भूमिहीन बढ़ रहे हैं। चारों ओर संसाधनों की भरमार है, पर आम आदमी भूखा मर रहा है। आखिर कब मिलेगी भूखमरी से आजादी ?
असुरक्षा - आज विज्ञान और प्रौद्यिगिकी का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, लेकिन असुरक्षा आम आदमी के लिए अभिशाप बना हुआ है। अकाल, बाढ़ एवं चक्रवात से मुक्ति क्यों नहीं मिल पाई है ?




ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता - 2 के लिए हमें बहुत सारे मित्रों ने अपने उत्तर भेजे हैं। सभी का हार्दिक आभार।
सभी प्रश्नों के सही हल भेजने वालों की संख्या 3 रही। 
विजेताओं के नाम इस प्रकार हैं।
-- प्रथम पुरस्कार -  50/- का मोबाइल रिचार्ज
विजेता - महक जायसवाल, दिल्ली
-- द्वितीय पुरस्कार - 50/- का मोबाइल रिचार्ज
विजेता - चंचल ठाकुर, रायपुर (छ.ग.)
-- तृतीय पुरस्कार - 50/- का मोबाइल रिचार्ज
विजेता - शिवांश मिश्रा, समस्तीपुर (बिहार)
नोट :- विजेताओं का मोबाइल रिचार्ज 5 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा।

सराहनीय प्रयास
                      हम उन मित्रों के नाम नीचे दे रहे हैं जिन्होंने अधिकतम प्रश्नों के उत्तर सही दिए हैं। इनके प्रयास सराहनीय हैं। आशा करते हैं आगे भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करेंगे व विजेता बनेंगे।
-- किशन सिंह राठौर, चित्तौड़गढ़ (राज.)
-- मिथिलेश पाठक, रीवां (म.प्र.)
-- मोह. उमर, फ़ैजाबाद (उ.प्र)
-- विरम सिंह देवड़ा, सुरावा (राज.)
-- राजीव, इटावा (उ.प्र.)

ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता - 2 : सही उत्तर
प्रश्न 1. उत्तर - B. होमो सेपियंस
प्रश्न 2. उत्तर - B. सलमान रशदी
प्रश्न 3. उत्तर - A. थिंपू
प्रश्न 4. उत्तर - C. किंग अब्दुल अजीज इंटरनेशनल एयरपोर्ट
प्रश्न 5. उत्तर - C. सुमेरिया
प्रश्न 6. उत्तर  - C. None of the above
प्रश्न 7. उत्तर  - B. कमलेश्वर
प्रश्न 8 . उत्तर  - C. 36
प्रश्न 9. उत्तर  - C. महाकाव्य
प्रश्न 10. उत्तर  - C. तंत्रिका कोशिका 

तैयार रहें : ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता -3 के प्रश्न 1 सितंबर  को पूछे जायेंगे।

ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता - 2


                            मित्रों 'सफलता सूत्र' आपके लिए लेकर आया है, हिन्दी की पहली 'ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता'। यहां आप पाएंगे ज्ञान और उपहार का खजाना। यह प्रतियोगिता प्रारंभ करने का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी का सम्मान व आप सभी का ज्ञान अभिवर्धन करना है। यह प्रतियोगिता उन सभी प्रतिभाशाली मित्रों को प्रोत्साहित करने के लिए है जो इंटरनेट पर समय का सदुपयोग करते हुए अपने ज्ञानकोश में वृद्धि व उपहार प्राप्त करना चाहते हैं।

ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता में शामिल होने संबंधी विस्तृत जानकारी व नियम-शर्तें :-
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 इस प्रतियोगिता के अंतर्गत विविध विषयों से चुने हुए 10 प्रश्न पूछे जायेंगे, जो वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice) के रुप में होंगे।
-- प्रश्नों के उत्तर भेजने के लिए नीचे दिए गए फॉर्म को भरकर अपना सही उत्तर पर टिक लगाकर सबमिट कर दें.
-- फॉर्म में अपना नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर व ईमेल आई डी अवश्य लिखें। विजेता घोषित होने पर सिर्फ आपका नाम व राज्य का नाम प्रकाशित किया जाएगा, पूरा पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आई. डी. नहीं। यानी आपकी प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
-- इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए किसी भी प्रतिभागी से किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा यह पूरी तरह निःशुल्क है। उपहार के लिए भी कोई राशि नहीं देना होगा।
-- ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता पाक्षिक यानि महीने में दो बार आयोजित की जाएगी। महीने की 1 तारीख और 15 तारीख को।
-- सभी 10 प्रश्नों के सही हल भेजने वाले प्रतिभागी ही उपहार के ड्रा के लिए चयनित होंगे।
-- 1 तारीख वाले प्रतियोगिता का सही हल व विजेताओं के नाम 14 तारीख को व 15 तारीख वाले का 30 तारीख को 'सफलता सूत्र.कॉम' में प्रकाशित किया जाएगा।
-- विजेताओं के नाम प्रकाशित होने के 5 दिनों के भीतर उनका मोबाइल रिचार्ज कर दिया जाएगा.
-- एक भी सही उत्तर प्राप्त नहीं होने की स्थिति में प्रतियोगिता की समयावधि आगे 15 दिन के लिए बढ़ा दी जाएगी।
--1 तारीख को पूछे गये प्रश्नों का उत्तर 13 तारीख शाम तक एवं 15 तारीख वाले का सही हल 29 तारीख शाम तक भेज दें।
-- एक प्रतियोगिता में 10 से अधिक प्रतिभागी का सही हल मिलने की स्थिति में विजेताओं का चयन ड्रा द्वारा किया जाएगा।
-- उपहार (मोबाइल रिचार्ज) दस विजेताओं को प्रदान किया जाएगा, जिसका चयन ड्रा द्वारा होगा।

उपहारों का विवरण :-

प्रथम उपहार     -   50/- का मोबाइल रिचार्ज
द्वितीय उपहार -   50/- का मोबाइल रिचार्ज
तृतीय उपहार    -   50/- का मोबाइल रिचार्ज
चौथा उपहार     -   20/- का मोबाइल रिचार्ज
पांचवां उपहार   -   20/- का मोबाइल रिचार्ज
छठवां उपहार    -   20/- का मोबाइल रिचार्ज
सातवां उपहार   -   10/- का मोबाइल रिचार्ज
आठवां उपहार   -  10/- का मोबाइल रिचार्ज
नौवां उपहार     -   10/- का मोबाइल रिचार्ज
दसवां उपहार    -  10/- का मोबाइल रिचार्ज

नोट :- ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता संबंधी जानकारी नियमित रुप से मिलती रहे इसके लिए 'सफलता सूत्र.कॉम' को अपने ईमेल से सब्सक्राइब अवश्य करें या निम्न सोशल साइट्स के माध्यम से हमसे जुड़ें




तो लीजिये प्रस्तुत है 'ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता क्रमांक - 2 के 10 प्रश्न :-

ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता - 2


  • ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता 2 (1-15 अगस्त 2016)

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