Halloween party ideas 2015


जल : आज और कल                              
                                           प्रकृति प्रदत्त वरदानों में पानी एक ऐसी चीज है जिसके अतिशय दोहन का परिणाम आज सामने है। जल संकट आज विश्व संकट बनकर उभरा है। देश के ज्यादातर जगहों पर पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है।पानी के बिना जीवन के अस्तित्व की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जितना जल हमारे आसपास है उसका लगभग 97.5 फीसदी खारा है एवं उपयोग के लायक नहीं है। स्वच्छ जल की मात्रा लगभग 2.5 प्रतिशत है। पृथ्वी पर उपलब्ध संपूर्ण जल का लगभग 0.007 प्रतिशत ही आसानी से मानव उपयोग के लिए उपलब्ध होता है।
                                आंकड़ों के मुताबिक 2025 तक दुनिया की आबादी 8 अरब और 2050 तक 9 अरब को पार कर जायेगी। आगामी 15 वर्षों में दुनिया के 180 करोड़ लोग ऐसे देशों में रह रहे होंगे जहां पानी लगभग पूरी तरह समाप्ति की ओर होगा। यह आंकड़ें अत्यंत भयावह है। यदि अभी भी हम जल संरक्षण के प्रति सचेत नहीं हुए तो निश्चित रुप से पानी को लेकर तीसरे विश्व युद्ध की बात हकीकत बन सकती है। आज जब दुनिया में भूजल भंडार तेजी से खत्म हो रहे हैं, बेशकीमती पानी को आने वाली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए हम सबको पानी की एक-एक बूंद सहेजना होगा।
                                आइए पानी से जुड़ें भयावह तथ्यों पर नजर डालें, और संकल्प लें जल संरक्षण का। याद रखें - " जल संरक्षण-जीवन संरक्षण"।

-- विश्व में लगभग 1.20 अरब लोगों को प्रतिदिन पानी ले लिए संघर्ष करना पड़ता है।
-- भारत में प्रतिवर्ष वर्षा से जितना पानी मिलता है, उसका 18 प्रतिशत ही उपयोग में आ पाता है। बाकि 82 प्रतिशत पानी नदियों से होकर समुद्र में मिल जाता है।
-- खाद्यान्न उत्पादन पर प्रतिदिन प्रति व्यक्ति लगभग 2000 से 5000 लीटर पानी खर्च होता है।
-- भारत में गंदे पानी से हर साल एक लाख लोग मर जाते हैं।
-- वर्ष 1900 से अब तक विश्व में आधे वेटलैंड खत्म हो चुके हैं।
-- 2030 तक दुनिया के 47 प्रतिशत लोग सूखाग्रस्त क्षेत्रों में रह रहे होंगे।
-- 2025 तक हमारे देश में पानी की मांग में 7900 करोड़ लीटर की वृद्धि हो जायेगी।
-- 2030 तक हिमालय से मिलने वाले पानी की मात्रा में 20 प्रतिशत तक की कमी होने की आंशका है।
-- 2020 तक दुनिया की आधी आबादी शहरी क्षेत्रों में रह रही होगी। यदि इसी तेजी से पानी बर्बाद करते रहे तो अधिकांश जल स्रोत सूख चुके होंगे।
-- 2030 तक विकासशील देशों में फसलों का उत्पादन 67 फीसदी बढ़ेगा लेकिन पानी का इस्तेमाल 14 फीसदी तक सीमित हो जाएगा।
-- देश में वर्ष 2050 तक प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता 3120 लीटर ही रह जायेगी। 2001 में यह 5020 लीटर तथा 1951 में 14180 लीटर थी।
-- मौजूदा तेजी से यदि जल का दोहन होता रहे तो 2035 तक भारत में 60 प्रतिशत भूजल भंडार समाप्त हो जाएंगे।
 

Post a Comment