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31 May - World No Tobacco Day : Hindi Article


पूरी दुनिया को तंबाकू के दुष्प्रभावों से बचाने व लोगों को इससे होने वाली गंभीर बीमारियों के प्रति सचेत करने के उद्देश्य से विश्व स्वास्थ्य संगठन के सदस्यों द्वारा 1987 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाने का फैसला किया गया। इन दशकों में दुनिया ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं, लेकिन तंबाकू आज भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। नशे में डूबकर भविष्य को अंधकारमय बना रहे युवा प्रश्नवाचक चिन्ह बनकर हमारे सामने खड़ा है।
क्यों जाते हैं नशे की ओर
तंबाकू के विज्ञापनों पर पाबंदी एवं तंबाकू की रोकथाम के लिए किए गए अनेक सरकारी व गैर सरकारी उपायों के बावजूद बच्चों से लेकर युवा पीढ़ी तक तंबाकू के विविध प्रयोग जैसे पान मसाला, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, गुड़ाकू, खैनी, सिगार आदि की गिरफ्त में है। हमें सोचना होगा कि आखिर वे कौन सी परिस्थितियां हैं जिसके कारण सबसे अधिक हमारी युवा पीढ़ी इस बुराई की तरफ अग्रसर होते हैं।
इसके कारणों में यदि घर-परिवार का कोई बड़ा सदस्य तंबाकू सेवन करता है, तो बच्चों के लिए इसकी पहुंच आसान हो जाती है। स्कूलों-कॉलेजों में बढ़ता पढ़ाई का बोझ एवं अध्यापक-विद्यार्थी के बीच आ रही रिश्तों में गिरावट। घरेलू रिश्तों की उलझनें। कमजोर सामाजिक व आर्थिक ढांचा।युवाओं में अपने भावी कैरियर को लेकर अनिश्चितता, साथ ही साल-दर-साल बढ़ रही बेरोजगारी, जिससे बढ़ रहा मानसिक तनाव भी इस नशे का कारण है। इंटरनेट पर बिना रोक-टोक के परोसी जा रही अश्लीलता व सहज उपलब्ध नशे से जुड़े लिंक्स भी कहीं न कहीं तंबाकू सेवन को बढ़ावा दे रहा है।
हर कश के साथ धुआं होती जिंदगी
तंबाकू सेवनकर्ता से पूछा जाय कि आपने ऐसा आत्मघाती व्यसन क्यों पाल रखा है, तो उनका उत्तर सुनकर बड़ी खीझ होती है, कहते हैं तनाव भरी जिंदगी में तंबाकू उन्हें राहत देती है। कुछ ऐसे भी लोग हैं जो ' छूटती नहीं यह काफिर मुंह से लगी हुई ' कहकर बेबसी व्यक्त करते हैं। लेकिन मिथ्या आनंद, क्षणिक उत्तेजना के लिए जिंदगी दांव पर लगाने वाली बात हजम नहीं होती। मजबूरी में या जानबूझकर खुद को मौत के मुंह में झोंकने की यह इंसानी फितरत समझ से परे है। दरअसल सिगरेट, बीड़ी या सिगार के धुएं में हमारी युवा पीढ़ी सुकून बटोरना चाहता है। कई लोग सिगरेट पीने को अपनी शान समझते हैं। इन तमाम तरह के नशे के आदी यह भूल जाते हैं कि इस सुकून और शान के आगे दर्जनों जानलेवा बीमारियों (जैसे मुंह व फेफड़े का कैंसर, ब्रोंकाइटिस, हृदयाघात, हाई ब्लड प्रेशर, दांतों की बीमारियां, अंधत्व आदि) की मुंह बाए खड़ी कभी न खत्म होने वाली कतारें हैं। और इसका अंत है असमय भयावह मौत।
दृढ़ संकल्प ही एक मात्र विकल्प
जितनी सहजता से तंबाकू उपलब्ध है, उससे ज्यादा मुश्किल है इससे छुटकारा, लेकिन असंभव कदापि नहीं। कोई भी नशा चाहे वह छोटा हो या बड़ा इंसान के सोचने-समझने की क्षमता को सबसे पहले आहत करता है, तभी तो तंबाकू के खतरनाक परिणामों को जानने के बावजूद लोग इससे मुक्त नहीं हो पा रहे हैं। यदि सचमुच तंबाकू से निजात पाना है तो एकमात्र विकल्प है, दृढ़ संकल्प। अपने स्वर्णिम व स्वस्थ जीवन के लिए दृढ संकल्पित हो आज अभी तंबाकू को कहें - 'ना'। याद रखें ' तंबाकू को आपने पकड़ा है, तंबाकू ने आपको नहीं।'
-- उमेश कुमार साहू

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