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कितने छोटे है हम?

लेखक : भारत मित्तल
                                            वैसे तो हम मनुष्य अपने आप को ब्रह्मांड का सबसे बुद्धिमान जीव कहते हैं और शायद हो भी।
                                            पर यहाँ हम बात कर रहे हैं आकार की। आप सब सूक्ष्म जीवों के बारे में तो जानते होंगे ही, कितने छोटे होते हैं ना। आप उन्हें नग्न आँखों से तो कभी देख भी नहीं सकते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि आप इस ब्रह्मांड में उनसे भी छोटे अनुपात में है।
                                            चलिए एक अंदाजा लगाया जाए। एक छोटी सी यात्रा पर पृथ्वी से दूर चलते हुए।
आप पृथ्वी पर कितने छोटे है यह तो आपको पता ही है। हमारी पृथ्वी कितनी छोटी सी है पता है? बृहस्पति, सबसे बड़ा ग्रह पृथ्वी से 1300 गुना अधिक बड़ा है और हमारा सूर्य पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है। पृथ्वी का व्यास 13 हजार किलोमीटर के आसपास है और बृहस्पति के लाल तूफान (Red spot) का व्यास करीब करीब 25-26 हजार किलोमीटर है। सूर्य पर बनने वाले धब्बे भी पृथ्वी से काफी बड़े होते हैं और तो और सूर्य की सतह पर उठने वाली लपटे भी कई लाख किलोमीटर की होती है।
                                              खैर ये तो छोटी बात है कुछ बड़ा सोचते हैं। तारों की बात करते हैं, आखिर तारें बड़े -बड़े होते हैं। हमारा सूर्य कितना विशाल है! सारे ग्रह उसके आगे बौने है।
                                              परंतु कितना विशाल है? मैं किसी छोटे तारे की बात नहीं करूँगा एक तारा है UY Scuti(अब तक का खोजा गया सबसे बड़ा तारा)। इस तारे की त्रिज्या सूर्य की त्रिज्या की लगभग 1700 गुनी बड़ी है। अनुमान ऐसे लगा सकते हैं कि अगर इस तारे को सूर्य की जगह रख दिया जाए तो यह इसकी सतह बृहस्पति की कक्षा से भी पार चली जाएगी। कुछ वैज्ञानिक तो इसका आकार और भी बड़ा मानते हैं। खैर यह तो छोटी मोटी चीजें हैं और बड़े स्तर पर चलते हैं।
                                                सौर मंडल की बात करते हैं। कितना बड़ा है, प्लूटो की कक्षा ही लगभग 35 खगोलीय-इकाई की है, उससे अलग ऊर्ट बादल तो 50,000 खगोलीय-इकाई तक फैला है। सौर मंडल का तो हमारी मंदाकिनी में विशेष स्थान होगा?
                                                 नहीं है। हमारा सौर मंडल हमारी मंदाकिनी में इतना ही बड़ा है जितनी बड़ी कोई सीडी डिस्क प्रशांत महासागर में है। आखिर ऐसे 100 अरब तारे है हमारी मंदाकिनी में, एंड्रोमेडा में तो लगभग 400 अरब तारे है। तो चलिए मंदाकिनियों की ही बात करते हैं। वे तो बहुत बड़ी होती है।
                                                 अब तक की सबसे बड़ी खोजी गई मंदाकिनी IC1101 हमारी पृथ्वी से करीब एक अरब प्रकाश वर्ष दूर है और आकार में हमारी मंदाकिनी से साठ गुना बड़ी है। हमारी मंदाकिनी का व्यास लगभग एक लाख प्रकाश वर्ष है। IC1101 का लगभग 58 लाख प्रकाश वर्ष। इसका अनुमान ऐसे लगा सकते हैं कि पृथ्वी के सबसे नजदीकी मंदाकिनी एंड्रोमेडा पृथ्वी से 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर है। मतलब कि IC1101 का व्यास इस दूरी के दुगुने से भी थोड़ा अधिक है।
                                                    अरे ये क्या ये तो मंदाकिनियाँ भी छोटी दिखने लगी ! पृथ्वी से काफी दूर आ गये हैं हम यहां से हम अपनी मंदाकिनी (मिल्की-वे) को भी नहीं देख सकते। सूर्य और पृथ्वी की तो बात ही नहीं।
                                                    थोड़ा सा और चलते हैं - जितने ब्रह्मांड पर हमारी दूरदर्शियाँ काबिल-ए-गौर फरमा सकती है उसका व्यास लगभग 91 अरब प्रकाश वर्ष है और इसमें करीब करीब 200 अरब मंदाकिनियाँ है, और सुनिए यह देखा गया ब्रह्मांड सम्पूर्ण ब्रह्मांड का छोटा सा ही हिस्सा हो ऐसा संभव है।
                                                      अब आप स्वयं सोच सकते हैं कि आकार में कितना छोटा है परंतु मस्तिष्क से बहुत बड़ा। और एक बात अगर किसी ने यह ब्रह्मांड बनाया होगा तो शायद ही उसे इतनी फुर्सत हो कि हमारे ऊपर नजर घुमा सके।

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