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लू लगने के कारण, लक्षण और बचाव के आसान उपाय
Heat Stroke : Causes, Symptoms and Prevention


                                            ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली अत्यंत गर्म हवा के थपेड़ों को लू (Heat Stroke) कहा जाता है। हमारे देश में हर साल सैकड़ों लोग लू लगने से मौत के मुंह में समा जाते हैं। गर्मी के दिनों में विशेष सावधानी बरतकर लू से बचा जा सकता है, फिर भी यदि लू लग जाए तो तुरंत योग्य चिकित्सक की मदद लेनी चाहिए।
लू लगने का कारण (Heat Stroke Causes)
                                           लू लगने का मुख्य कारण है तेज धूप और गर्म हवा का शरीर पर, विशेषकर सिर पर तीव्र आघात होना। खुला शरीर, नंगे सिर व पैर, भूखे-प्यासे तेज धूप और गर्म हवा में घूमने से शरीर का तापमान नियंत्रित करने वाला सिस्टम शरीर को ठंडा नहीं रख पाता, तब शरीर में गर्मी भर जाती है। इससे शरीर का पानी किसी न किसी रूप में बाहर निकल जाता है। शरीर की ठंडकता खत्म हो जाती है, तेज बुखार आने लगता है। इसे लू लगना कहते हैं।
लू लगने के लक्षण (Symptoms of Heat Stroke)
                                          लू लगने से मांसपेशियों में खिंचाव आ जाता है, शरीर टूटने लगता है और प्यास बढ़ जाती है। मुंह सूखना, हथेलियों, तलुओं व आंखों में जलन होना, तेज बुखार होना (कई बार बुखार 105 से 106 फॉरेनहाइट तक पहुंचना), बेचैनी, घबराहट आदि लू लगने के लक्षण हैं।
लू से बचने के आसान उपाय (Easy Tips For Prevention from Heat Stroke)
-- तेज धूप एवं तेज गर्म हवा के थपेड़ों से बचना लू लगने से बचाव का पहला उपाय है।
-- यदि लू के वातावरण में बाहर जाना जरूरी हो तो भूखे-प्यासे या खाली पेट घर से न निकलें। ठंडा पानी पीकर एवं भोजन करके ही बाहर जाएं।
-- सिर, चेहरे, कान व आंख को अच्छी तरह से ढ़ककर ही बाहर निकलें। पैदल जाना हो तो छाता लेकर चलें, दोपहिया वाले हेलमेट लगा लें।
-- कान बंद होने से गर्म हवा यानी लू का असर नहीं होता, इसलिए कानों को तेज लपट से बचाने के लिए तौलिया लपेटकर निकलें।
-- ए.सी., कूलर के ठंडे वातावरण से निकलकर तुरंत गर्म वातावरण में न जाएं। ऐसे ही गर्म वातावरण से आकर तुरंत ठंडे वातावरण में न जाएं। पहले शरीर के तापमान को सामान्य होने दें। अचानक तापमान में हुए बदलाव से लू का खतरा बढ़ जाता है।
-- लू से बचाव के लिए आम का पना, नींबू की मीठी शिकंजी, पोदीना, प्याज, जलजीरा, नारियल पानी, गन्ने का रस, बेल का शर्बत, खस का शर्बत आदि पेय पदार्थों का सेवन करते रहें।
-- एक बड़ा प्याज जेब में रखकर घर से निकलने पर लू नहीं लगती।
-- गर्मी के दिनों में नरम, ढीले, सूती के कपड़े पहने।


गर्मियों में स्वास्थ्य रक्षक उपाय


                                                            ग्रीष्म ऋतु अपने चरम पर है। गर्म हवा के थपेड़ों ने घर से निकलना दूभर कर रखा है। ऐसे में आहार-विहार पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही बीमारियों को आमंत्रित करने के लिए काफी है।
                                                      आइए जानें गर्मी के दिनों में किए जाने वाले स्वास्थ्य रक्षक उपायों के बारे में -
-- ग्रीष्म ऋतु में प्रात: जल्दी उठें। शौचादि से निवृत्त होकर प्रात: भरमण के लिए जरूर जाएं। प्राणायाम, योगासन, कसरत करें।
-- इन दिनों प्यासे नहीं रहें। दिन भर में हर घण्टे 1-1 गिलास ठंडा पानी पीते रहें। घर से बाहर निकलना हो तो 1 गिलास ठंडा पानी पीकर निकलें, इससे लू नहीं लगेगी।
-- सुबह अपनी क्षमतानुसार ठंडा पानी पीकर शौच जाएं, इससे कब्ज से मुक्ति मिलती है साथ ही पेट संबंधी अन्य विकार दूर होते हैं।
-- तेज धूप से घर में या ठंडी जगह में आएं तो तुरंत ठंडा पानी या शीतल पेय पीने से बचें। कुछ देर रुककर शरीर को सामान्य होने के बाद ही ठंड पानी पिएं।
-- फ्रिज का बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीने के बजाय मटके या सुराही का पानी पीना ज्यादा अच्छा रहता है। फ्रिज का ठंडा पानी गले, दांतों, आमाशय व आंतों के लिए नुकसानदायक होता है।
-- तेज धूप में घर से बाहर निकलना हो तो सिर को टोपी या तौलिया से अच्छी तरह ढककर ही निकले। इससे धूप से सिर का बचाव होता है और लू नहीं लगती।
-- गर्मी के दिनों में तेज मिर्च मसालेदार, तले-भुने हुए, अचार, खट्टे व डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों का सेवन करने से बचें। सलाद अधिक खाएं।
-- इन दिनों रात्रि का भोजन हल्का व सुपाच्य करना चाहिए। गर्मी के कारण पाचन शक्ति कमजोर होने से यदि रात में अधिक व गरिष्ट भोजन किया जाय तो कब्ज, अपच, गैस ट्रबल और हाइपर एसिडिटी की शिकायत हो सकती है।
-- इस ऋतु में पका मीठा लाल तरबूज, संतरा, केला, अंगूर मीठा आम, ककड़ी, नींबू की मीठी शिकंजी, पोदीना, प्याज, जलजीरा, बेल का शर्बत, ठंडाई, मीठा दही, लस्सी, गन्ने का रस, आम का पना आदि का सेवन अवश्य करें। ये सभी बहुत लाभप्रद है।
-- गर्मी के दिनों में हल्के रंग के खादी या कॉटन के कपड़े पहने। यह गर्मी में शीतलता का अहसास कराते हैं।


इन दिनों Apps का चलन जोरों पर है। Apps हमारी दिनचर्या में रच-बस गई है। प्रतिदिन एक से बढ़कर एक ऐप हमारी जिंदगी को आसान, ज्ञानवान व सुरक्षित बनाने सामने आ रहे हैं, लेकिन इन ढ़ेरो ऐप में से काम की ऐप निकलना बड़ी टेढ़ी खीर है। आज आपके लिए ऐसे ही कुछ उपयोगी ऐप की जानकारी प्रस्तुत है। निश्चित रूप से यह आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।
Google Translate
यह एप लिखकर या microphone पर बोले गए किसी भी शब्द का अनुवाद स्क्रीन पर दिखाता है। लैंग्वेज पैकेज डाउनलोड करने से यह ऑफलाइन में भी अनुवाद करने में सक्षम है। विदेश घूमने वालों के लिए google translate बहुत उपयोगी app है। यह 90 भाषाओँ का अनुवाद कर सकता है।
DJ Studio 5 - Free Music Mixer 
स्मार्टफोन या टेबलेट पर basic track mixing और effects डालने के लिए यह app बहुत कारगर है।
Battery Guru
इस app की सहायता से आपको पता चलता है कि फोन को कैसे इस्तेमाल किया जाए जिससे बैटरी बचाया जा सके। इस एप की मदद से आप मोबाइल की बैटरी लगभग 20 प्रतिशत तक बचा सकते हैं।
Scribd -A World of books
पढ़ने के शौकीनों के लिए Scribd लगभग 10 लाख किताबें ब्राउस करने का मौका देती है। यहां पर विश्व की एक से बढ़कर एक बुक्स, Audiobooks, Comics, Documents एवं Sheet music उपलब्ध है।
onlinetyarihindi
विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे परीक्षार्थियों के लिए यह एप बहुत उपयोगी है। यहां पर प्रश्न बैंक, मॉक परीक्षा, सामान्य ज्ञान आदि संबंधी विविध पाठ्य सामग्री उपलब्ध है। ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों में उपयोग किया जाने वाला यह एप हिन्दी और अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है।

अहंकार


असीम अनंत
ब्रह्मांड...
करोड़ों
आकाशगंगाएं...
सहस्त्र
सूर्य, चांद, तारे, ग्रह, नक्षत्र...
उसमें
हमारी पृथ्वी
धूल कण सा...
जिसमें
अनेक द्वीप, देश...
हजारों शहर, नगर, कस्बे, गांव...
और इनमें
रहने वाले
अरबों मनुष्य...
जिनका अस्तित्व
धूल कण से भी
सूक्ष्मतम...
लेकिन
अहंकार
ब्रह्मांड सा विस्तृत
असीम अनंत...
          -- उमेश कुमार

कितने छोटे है हम?

लेखक : भारत मित्तल
                                            वैसे तो हम मनुष्य अपने आप को ब्रह्मांड का सबसे बुद्धिमान जीव कहते हैं और शायद हो भी।
                                            पर यहाँ हम बात कर रहे हैं आकार की। आप सब सूक्ष्म जीवों के बारे में तो जानते होंगे ही, कितने छोटे होते हैं ना। आप उन्हें नग्न आँखों से तो कभी देख भी नहीं सकते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि आप इस ब्रह्मांड में उनसे भी छोटे अनुपात में है।
                                            चलिए एक अंदाजा लगाया जाए। एक छोटी सी यात्रा पर पृथ्वी से दूर चलते हुए।
आप पृथ्वी पर कितने छोटे है यह तो आपको पता ही है। हमारी पृथ्वी कितनी छोटी सी है पता है? बृहस्पति, सबसे बड़ा ग्रह पृथ्वी से 1300 गुना अधिक बड़ा है और हमारा सूर्य पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है। पृथ्वी का व्यास 13 हजार किलोमीटर के आसपास है और बृहस्पति के लाल तूफान (Red spot) का व्यास करीब करीब 25-26 हजार किलोमीटर है। सूर्य पर बनने वाले धब्बे भी पृथ्वी से काफी बड़े होते हैं और तो और सूर्य की सतह पर उठने वाली लपटे भी कई लाख किलोमीटर की होती है।
                                              खैर ये तो छोटी बात है कुछ बड़ा सोचते हैं। तारों की बात करते हैं, आखिर तारें बड़े -बड़े होते हैं। हमारा सूर्य कितना विशाल है! सारे ग्रह उसके आगे बौने है।
                                              परंतु कितना विशाल है? मैं किसी छोटे तारे की बात नहीं करूँगा एक तारा है UY Scuti(अब तक का खोजा गया सबसे बड़ा तारा)। इस तारे की त्रिज्या सूर्य की त्रिज्या की लगभग 1700 गुनी बड़ी है। अनुमान ऐसे लगा सकते हैं कि अगर इस तारे को सूर्य की जगह रख दिया जाए तो यह इसकी सतह बृहस्पति की कक्षा से भी पार चली जाएगी। कुछ वैज्ञानिक तो इसका आकार और भी बड़ा मानते हैं। खैर यह तो छोटी मोटी चीजें हैं और बड़े स्तर पर चलते हैं।
                                                सौर मंडल की बात करते हैं। कितना बड़ा है, प्लूटो की कक्षा ही लगभग 35 खगोलीय-इकाई की है, उससे अलग ऊर्ट बादल तो 50,000 खगोलीय-इकाई तक फैला है। सौर मंडल का तो हमारी मंदाकिनी में विशेष स्थान होगा?
                                                 नहीं है। हमारा सौर मंडल हमारी मंदाकिनी में इतना ही बड़ा है जितनी बड़ी कोई सीडी डिस्क प्रशांत महासागर में है। आखिर ऐसे 100 अरब तारे है हमारी मंदाकिनी में, एंड्रोमेडा में तो लगभग 400 अरब तारे है। तो चलिए मंदाकिनियों की ही बात करते हैं। वे तो बहुत बड़ी होती है।
                                                 अब तक की सबसे बड़ी खोजी गई मंदाकिनी IC1101 हमारी पृथ्वी से करीब एक अरब प्रकाश वर्ष दूर है और आकार में हमारी मंदाकिनी से साठ गुना बड़ी है। हमारी मंदाकिनी का व्यास लगभग एक लाख प्रकाश वर्ष है। IC1101 का लगभग 58 लाख प्रकाश वर्ष। इसका अनुमान ऐसे लगा सकते हैं कि पृथ्वी के सबसे नजदीकी मंदाकिनी एंड्रोमेडा पृथ्वी से 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर है। मतलब कि IC1101 का व्यास इस दूरी के दुगुने से भी थोड़ा अधिक है।
                                                    अरे ये क्या ये तो मंदाकिनियाँ भी छोटी दिखने लगी ! पृथ्वी से काफी दूर आ गये हैं हम यहां से हम अपनी मंदाकिनी (मिल्की-वे) को भी नहीं देख सकते। सूर्य और पृथ्वी की तो बात ही नहीं।
                                                    थोड़ा सा और चलते हैं - जितने ब्रह्मांड पर हमारी दूरदर्शियाँ काबिल-ए-गौर फरमा सकती है उसका व्यास लगभग 91 अरब प्रकाश वर्ष है और इसमें करीब करीब 200 अरब मंदाकिनियाँ है, और सुनिए यह देखा गया ब्रह्मांड सम्पूर्ण ब्रह्मांड का छोटा सा ही हिस्सा हो ऐसा संभव है।
                                                      अब आप स्वयं सोच सकते हैं कि आकार में कितना छोटा है परंतु मस्तिष्क से बहुत बड़ा। और एक बात अगर किसी ने यह ब्रह्मांड बनाया होगा तो शायद ही उसे इतनी फुर्सत हो कि हमारे ऊपर नजर घुमा सके।

'प्रेम'

हरसिंगार का
नि: शब्द निशा में
चुपके से
झरने जैसा
होता है प्रेम...
कड़ी धूप में
गुलमोहर का
और सुर्ख होकर
खिलखिलाने जैसा
होता है प्रेम...
ओस की बूंद का
पत्ती की नोक पर
जगमगाने जैसा
होता है प्रेम...
धूप पर सवार
रंगों को समेट
तस्वीर बनाने जैसा
होता है प्रेम...
बसंत के विश्वास में
पतझड़ में
पत्ते गिरा देने जैसा
होता है प्रेम...
              -- उमेश कुमार