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International Women's Day 8 March
हमारे शास्त्रों में नारी को बहुत उच्च स्थान दिया गया है। मनु ने कहा है - जहां स्त्रियों की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं। नारी को शास्त्रों में तो ऊंचा स्थान मिला है परंतु व्यावहारिक जगत में पुरुषों की ही सत्ता समाज में कायम रही और नारी को हेय की दृष्टि से ही देखा गया। हिन्दी के मूर्धन्य रचनाकार मैथिलीशरण गुप्त की निम्न पंक्तियां नारी व्यथा की यथार्थ अभिव्यक्ति है।
" अबला जीवन तेरी तो बस यही कहानी
आंचल में है दूध और नयनों में पानी।"
देश के कुछ सभ्य समाज और जागरुक संगठन जहां महिला हित में निरंतर प्रयासरत है, वहीं नारी उत्पीड़न और अत्याचार के वीभत्स समाचार आए दिन दिलोदिमाग को झकझोरे हुए हैं। जहां तक सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन का प्रश्न है, महिलाओं की स्थिति अत्यंत कष्टप्रद है। हमारे देश में हर मिनट दहेज को लेकर एक मौत होती है, यौन उत्पीड़न का एक मामला दर्ज होता है और महिलाओं के खिलाफ कई आपराधिक वारदात होती है। आंकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष महिलाओं से संबंधित दर्ज 1.5 लाख अपराधों में से 50 हजार मामले घरेलू हिंसा के होते हैं। आज हमारे देश की बहुसंख्यक स्त्रियां पितृसत्तात्मक पाबंदियों के बीच एक सिमटी हुई दुनिया में जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
हमारे समाज में महिलाओं पर दहेज, प्रताड़ना, हत्या, छेड़छाड़ और बलात्कार की आए दिन होने वाली घटनाएं एक ऐसी बीमारी का लक्षण है जो समाज में महिलाओं को उनका सही दर्जा न मिलने के कारण उत्पन्न हुई है। अमीर हो या गरीब, शहरी हो या ग्रामीण सभी महिलाओं की चुनौतियां एक सी है। देश में महिलाओं पर बढ़ती हिंसा व अपराध के खिलाफ महिला सशक्तिकरण सिर्फ महिलाओं का जिम्मा नहीं, बल्कि पूरे समाज का होना चाहिए।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हमें याद दिलाता है कि आज जबकि नारी सशक्त होकर हर क्षेत्र में सबल बनने को प्रयासरत है, हम सभी को उसकी मदद के लिए सदैव तत्पर रहना है। संविधान एवं सरकारी कानून सभी इसके लिए प्रतिबद्ध है। स्त्रियों का संघर्ष स्वहित के साथ सारे समाज की बेहतरी के लिए है, संसार को समरसता व रचनात्मकता की ओर मोड़ने के लिए है। पुरुषों को चाहिए कि वह नारी की निजता व स्वतंत्र अस्तित्व का सम्मान करना सीखे, तभी एक बेहतर समाज की कल्पना साकार होगी।

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