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दिवस विशेष : मकर संक्रांति 
मीठा-मीठा पर्व मकर संक्रांति


नववर्ष के शुभागमन के साथ ही एक मीठा सा पर्व दस्तक देने लगता है, और वह है - मकर संक्रांति। मकर संक्रांति पर्व प्रतीक है शिशिर ऋतु की विदाई और हेमंत ऋतु के आगमन का। जैसे ही ठंड विदा लेने को होती है और गर्मी की हल्की आंच अपना असर दिखाना शुरु करती है, मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। 
मकर संक्रांति का धार्मिक महत्व                                          
पौराणिक मान्यता है कि सूर्य के मकर राशि में होने से मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति आत्मा मोक्ष को प्राप्त करती है। उन आत्माओं को जन्म- जन्मांतर के बंधनों से मुक्ति मिल जाती है। एक और मान्यता के अनुसार इस काल में पैदा हुआ बच्चा तेजस्वी, बुद्धिमान और दीर्घायु को प्राप्त होते है. ऐसा माना जाता है कि महाभारत काल में अर्जुन के बाणों से घायल भीष्म पितामह ने गंगा तट पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का 26 दिनों तक इंतजार किया था। चूंकि भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था, इसलिए वे सूर्य के उत्तरायण होने पर ही मृत्यु को प्राप्त हुए और मोक्ष को प्राप्त हुए। भारतीय संस्कृति के अनुसार सूर्य तेज, ओजस एवं गति के प्रतीक तथा अधिष्ठाता हैं। सूर्य के कारण ही हमारी धरती पर जीवन और उससे संबद्ध समस्त गतिविधियां संभव हैं।                                            
मकर संक्रांति के पर्व पर स्नान और दान और यज्ञ का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन दिया गया दान इस जन्म में और अगले जन्म में करोड़ों गुना होकर मिलता है। संक्रांति के दिन तिल का विशेष महत्व माना गया है। इस दिन प्रात: काल जल्दी उठकर तिल का उबटन शरीर पर लगाकर तिल मिश्रित जल से स्नान करना चाहिए। तिल-गुड़ का प्रसाद लेने के बाद भोजन करें। इस दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। दान धर्म तो हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है, क्योंकि दान करने से लोभ, लालसा व संचय की प्रवृत्ति कम रहती है।                                               
मकर संक्रांति पर तिल-गुड़ खाने का विशेष महत्व है। तिल में तेल होने से यह अत्यंत ही कोमल होती है, इसलिए मीठे के रूप में अच्छे स्वास्थ्य के लिए तिल का प्रयोग किया जाता है। तिल- गुड़ का मिश्रण या लड्डू एक-दूसरे को खिलाया जाता है, ताकि आपसी रिश्तों में मिठास बनी रहे। यह दिन बच्चों और युवाओं के लिए कई सौगातें लेकर आता है। देश के अनेक प्रांतों में पतंग उड़ाई जाती है। अनेक जगह पतंगबाजी की कई प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाती हैं। इस अवसर पर विचित्र आकार-प्रकार की पतंगें बनाकर उड़ाई जाती हैं।                                               
शुभकामना, मित्रता, उत्साह एवं उमंग का यह उत्सव जहां पूरे भारत वर्ष में धूमधाम से मनाया जाता है, वहीं विदेशों में भी जहां-जहां भारतीय मूल के लोग हैं वहां मकर संक्रांति पूरे उत्साह-उमंग के साथ मनाया जाता है।    
विशेष - सन् 2016, 2020 एवं इसके बाद प्रति चार वर्ष बाद मकर संक्रांति 15 जनवरी को आती रहेगी। यह क्रम 2044 तक चलेगा। 22 वीं सदी में प्रति वर्ष 15 जनवरी के दिन मकर संक्रांति आने लगेगी।


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