Halloween party ideas 2015


नववर्ष के ये संकल्प आपको क्षमतावान, योग्य और श्रेष्ठ बनाने में मददगार सिद्ध होगी...


                                        नववर्ष का एक और शानदार उपहार हमारे जीवन को पुनः नव उमंग-उल्लास, नई ताजगी से भरकर नव सकारात्मक विचारों, नव संकल्पों एवं नव लक्ष्यों की दिशा में कदम बढ़ाने का। आइये इन नवीन बेशकीमती पलों के साथ संकल्प लें मन, वचन, कर्म से स्वस्थ, सुखी और समृद्धशाली बनने का।
सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।।  

सबसे बड़ा रोग क्या कहेंगे लोग - यदि आप अच्छाई की दिशा में आगे बढ़कर कार्य कर रहे हैं तो इस बात पर बिल्कुल भी ध्यान न दें कि लोग क्या सोचेंगे। किसी भी कार्य से हम छोटा या बड़ा नहीं हो जाते। अपनी-अपनी जगह में हर कार्य और इंसान का महत्व है, इसलिए मन लगाकर अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होकर कार्य करें, सफलता आपकी कदम चूमेगी और आप हमेशा खुश रहेंगे।

अहंकार का विसर्जन - खुद को दूसरों से श्रेष्ठ समझना अहंकार है। असफलता, असंतुष्टि और दुखमय जीवन का कारण हमारा अहंकार भी है। अहंकार से क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, घृणा आदि मानसिक दोष उत्पन्न होते है। अहंकार हमारे सोचने समझने की क्षमता को नष्ट कर देता है। इसलिए अहंकार त्यागें और सफलता एवं खुशियों का द्वार खोलें।

कुसंगति एवं नशा से बचें - इन दिनों विविध नशाओं का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। यह सब कुसंगति का परिणाम है। नशा तन और मन को धीरे धीरे वैसे ही नष्ट कर देती है जैसे कागज को दीमक चाट जाता है। दो घड़ी की मौज-मस्ती के लिए ईश्वर की बनाई सर्वश्रेष्ठ कृति इस शरीर व्यर्थ बीमार एवं नष्ट न करें, बल्कि शरीर को स्वस्थ व मजबूत बनाने का हमेशा प्रयास करें।      

तुलना एवं प्रतिस्पर्धा से बचें - जिस प्रकार दो व्यक्ति की उंगलियों के फिंगर प्रिंट एक समान नहीं हो सकते, उसी प्रकार किन्हीं दो व्यक्ति की आर्थिक, सामाजिक एवं व्यक्तिगत परिस्थितियां कभी भी एक जैसी नहीं हो सकती। इसलिए किसी से तुलना या प्रतिस्पर्धा करना छोड़ें। स्वयं के आत्मविकास में लगे रहें। एक-एक पल का सदुपयोग करते हुई स्वयं के उत्थान के लिए उस दिशा में आगे बढ़ें जो आपको मंजिल तक ले जाए।     

जीवन का सार्थक उद्देश्य बनाएं - जीवन का उद्देश्य सिर्फ धन कमाना, भौतिक सुख-साधन जुटाना एवं जीवन व्यतीत करना भर नहीं है। जीवन व्यतीत तो पशु-पक्षी भी कर अच्छे से कर लेते हैं। बात तो तब है जब हम स्वयं के लिए, परिवार के लिए, समाज के लिए और देश के लिए पूर्ण जिम्मेदारी  के साथ श्रेष्ठ, ईमानदार इंसान बनकर कुछ ऐसा उद्देश्य लेकर चलें जो सबके लिए हितकारी, सुखकारी और कल्याणकारी हो.
                  
निश्चित रूप से नववर्ष के ये संकल्प आपको क्षमतावान, योग्य और श्रेष्ठ बनाने में मददगार सिद्ध होगी।
-- उमेश कुमार


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नववर्ष विशेष
NEW YEAR ARTICLE IN HINDI



समय ही संपदा है                                                   
                                                      नववर्ष के रूप में हम सभी को फिर से 365 दिनों का बेशकीमती उपहार मिल गया है। अमीर हो या गरीब, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, अफसर हो या श्रमिक, प्रकृति का यह अनमोल तोहफा (समय) सभी को एक समान मिला हुआ है। फिर क्या कारण है कि इतने ही समय में कुछ लोग अपने ढ़ेरों काम निपटाकर बहुत आगे निकल जाते हैं, वहीं कुछ लोग समय का रोना रोते हुए वहीं के वहीं हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते हैं। इसका बड़ा कारण है समय प्रबंधन का अभाव।
                                                   यूं तो समय अथाह है अनंत है, लेकिन हमारी जीवन अवधि सीमित। हम समय नहीं बिताते, समय हमें बिता देता है। जो व्यक्ति इस बीत रहे समय की कीमत जानता है, वह कभी भी समय को व्यर्थ बर्बाद नहीं करता। वह जानता है " समय ही धन है।" और हर पल के सदुपयोग में ही इस जीवन की सार्थकता है। जिनको समय प्रबंधन की कला आती है, वे हर समय इसी दिशा में प्रयासरत रहते हैं कि किस कार्य को कब और कैसे किया जाए जिससे सही समय पर सार्थक व सफल परिणाम प्राप्त हो सके।
                                                     कुछ लोगों को अक्सर यह कहते सुना जा सकता है कि, क्या करें समय नहीं मिलता, अति व्यस्तता चल रही है, जबकि ऐसा नहीं है, हर वक्त व्यस्त रहकर भी समय का सदुपयोग संभव है। कुछ लोग अतिव्यस्त रहकर भी कुछ विशेष सफलता प्राप्त नहीं कर पाते, वहीं कुछ लोग उतने ही समय में उससे दुगुनी मात्रा में काम कर सफलता के शिखर पर पहुंच जाते हैं। गौरतलब है की यह सब संभव है, योजना बनाकर कार्य के क्रियान्वयन में और प्रतिपल सजग रहने में।
                                                      आज जीवन के हर क्षेत्र में समय के साथ नॉलेज अपडेशन और व्यक्तित्व विकास का महत्व बढ़ता जा रहा है, ऐसे में यदि आप खुद को पिछड़ता हुआ महसूस कर रहे हैं तो आवश्यकता इस बात की है कि समय के मामले में सचेत रहें। हर चीजों का योजना बनाकर चलें। समय के हिसाब से कार्ययोजना बनाकर उसे वैसे ही निपटाएं। अपनी पसंद और प्रकृति के अनुसार समय निर्धारण करें। 
अंत में नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ ध्यान रखें 'समय ही संपदा है.' यदि आप समय को महत्व देंगे तो समय आपको महत्व देगा।
-- उमेश कुमार

नए साल की कविता 
NEW YEAR HINDI POEM 



...नए साल में 
सच हो जाये सबके सपने नये साल में 
बेगाने बन जाये अपने नये साल में, 

दिल को दिल का मिले सहारा नये साल में 
बहे प्रेम की अविरल धारा नये साल में, 

हर मुखड़े पर मुस्कान खिले नये साल में 
हर जुबां को सुन्दर गान मिले नये साल में, 

सर्वत्र उठे सदभाव की लहरें नये साल में 
सारे दुर्भाव-विकार मरें नये साल में, 

सुख- दुःख बाटें सभी परस्पर नये साल में 
जाति-धर्म का रहे न अंतर नये साल में, 

विकसित हो तन-मन और जीवन नये साल में 
सुख शांति रहे धरा-गगन में नये साल में.

-- उमेश कुमार 

पर्व विशेष : क्रिसमस (25 दिसंबर) के अवसर पर
Cristmas Day Celebration (25 December) 
क्रिसमस की धूम सर्वत्र  


                                              क्रिसमस ईसाईयों का सबसे बड़ा त्यौहार है। यह ईसा मसीह के जन्म का उत्सव है, जो प्रतिवर्ष 25 दिसंबर को मनाया जाता है। लगभग दो हजार साल पहले इसी दिन ईसा मसीह का जन्म हुआ था। ईसा का जन्मदिन मनाने का प्रारंभ उसकी मौत के बाद करीब सन चार सौ से शुरू हुई थी। क्रिसमस का अर्थ होता है ईसा मसीह की प्रार्थना-सभा।
इस तरह हुआ यीशु का जन्म 
                                             प्रभु ईसा मसीह का जन्म येरुशलम के पास बेथलेहम (इजराइल) में एक गौशाला में हुआ था। नाजरथ नामक एक शहर में परमेश्वर का भेजा देवदूत मरियम नाम की कुंवारी लड़की के पास पहुंचा और उसे प्रभु यीशु के धरती पर अवतरण की सूचना दी। दैवीय आज्ञा के अनुसार मरियम को गर्भवती होना था और अपने मंगेतर जोजफ (यूसुफ) के साथ भागकर बेथलेहम जाना था उन दिनों इजरायल पर अत्याचारी रोमनों का राज था। दैवीय आज्ञा से अवगत रोमन सम्राट राज्य में जन्में हर नवजात शिशु की हत्या पर उतारू था। लिहाजा मरियम अपनी कोख में पल रहे शिशु को लेकर बेथलेहम पहुंची, पर वहां भी कहीं आश्रय न मिलने की वजह से विवश होकर उन्हें एक गौशाला में शरण लेनी पड़ी और प्रभु यीशु का जन्म हुआ।
क्रिसमस की धूम सर्वत्र 
                                               क्रिसमस का उल्लास इसे मनाने वालों के चेहरे पर तो झलकता ही है, साथ ही उतना ही उत्साह इस पवित्र धार्मिक पर्व को मनाने के तौर-तरीकों में नजर आता है। घरों की आकर्षक सजावट, क्रिसमस ट्री और रोशनी में जगमगाता सितारा, जो कि सभी को प्रभु ईसा मसीह के उपदेशों पर चलने की प्रेरणा देती है। क्रिसमस की पूर्व रात्रि यानी 24 दिसंबर को रात साढ़े दस बजे से चर्च में विशेष प्रार्थना व कैरल्स का आयोजन होने लगता है। फिर क्रिसमस मास (विशेष प्रार्थना) व मिडनाइट मास होता है। इसके बाद चर्च के फादर श्रद्धालुओं को प्रसाद देते हैं। प्रार्थना सभा के बाद सभी एक दूसरे को बधाईयां देते हैं। दूसरे दिन सुबह लोग अपने रिश्तेदारों, परिचितों को क्रिसमस केक व मिठाइयां खिलाते हैं। उपहारों का आदान-प्रदान होता है। आतिशबाजी की जाती है और बच्चों को सांता क्लॉज़ ढ़ेर सारे उपहार बांटते हैं।
-- उमेश कुमार साहू

र्ष विशेष : 
नववर्ष 2017 : साल दर साल, कितने सफल कितने असफल 


                                         चंद दिनों बाद दीवार की खूंटी से उतारकर यादों की खूंटी में एक और साल टांग दी जाएगी। साल का अंत न सिर्फ नववर्ष की तैयारी का होता है अपितु आत्मविश्लेषण का भी होता है। नववर्ष के प्रारंभ के साथ हमारे द्वारा बनाई गई योजनाओं की पूर्णता में आखिर हम कितने सफल हुए। कितनी योजनाएं बीच में छोड़ दी गई और कितनी भुला दी गई।आखिर कारण क्या रहा? जरा गंभीरता से सोचें। साल-दर-साल हम ढेरों योजनाएं बनाते हैं, लेकिन विभिन्न कारणों से अधिकांश योजनाएं पटरी से उतर जाती है। आइये जानें किन कारणों से हमारी योजनाएं सफल नहीं हो पाती।
योजनाबद्ध कार्य निर्धारण का अभाव - मान लीजिए आपने इस नववर्ष में 1 लाख बचत करने की योजना बनाई, लेकिन इसके लिए आपने न तो अपने आय-व्यय का लेखा-जोखा तैयार किया और न ही सही इन्वेस्टमेंट की ओर ध्यान दिया। निश्चित रूप से साल के आखिर तक आपका लक्ष्य अधूरा रह जाएगा। इसलिए यदि आप किसी भी लक्ष्य को पाना चाहते हैं पूरी योजनाबद्ध तरीके से काम से लेकर परिणाम तक का समुचित ढंग से निर्धारण करें।
अव्यवस्था एवं अति व्यस्तता  - साल की शुरुआत में हम एक साथ ढ़ेर सारी योजनाएं बना लेते हैं और धीरे धीरे यह अव्यवस्था एवं अति व्यस्तता की भेंट चढ़ जाता है। याद रखें भले ही आप साल में एक लक्ष्य बनाएं , लेकिन उसे मजबूत आधार देकर धैर्य, लगन और मेहनत के साथ पूरा करें। ऐसी उपलब्धि निश्चित रूप से टिकाऊ होगी।
सकारात्मकता की कमी - सफल व्यक्ति कुछ अलग काम नहीं करते, बल्कि वे हर काम को अलग ढंग से करते हैं। हम अक्सर अपनी नकारात्मक सोच के कारण असफल होते हैं। कहते हैं इंसान जैसा सोचता है वैसा बन जाता है। निश्चित रूप से यदि साल भर हम सकारात्मक विचारों और कार्यों से परिपूर्ण रहेंगे तो सफलता हमारी कदम चूमेगी।
मेहनत के बदले शॉर्टकट का फेर - याद रखिए एक सफल, सार्थक और समृद्ध जीवन निरंतर प्रयास करने से मिलता है। बड़ी उपलब्धियों को पाने का कोई शार्टकट नहीं होता। अचानक बिना मेहनत के धनवान या बहुत ऊंचाई में पहुंचने के फेर में न रहें, क्योंकि ऐसी ऊंचाई से गिरने में ज्यादा देर नहीं लगती। मेहनत व ईमानदारी से कमाया हुआ धन या उपलब्धियां ही फलदायी होती है।
सफलता की राह में हमारे ही बनाए रुकावटें - हमारी सफलता की राह में रोड़े हमारी अव्यवस्थित दिनचर्या, बेतरतीब घर-ऑफिस, कर्ज, अस्वस्थ तन-मन, फिजूल भागदौड़, तनाव आदि होते है। ये सभी हमारी स्वाभाविक शक्ति व रचनात्मक सोच को कम करते हैं। इनसे निजात पाने के लिए अपने हर पल को व्यवस्थित एवं टाइम टेबल के अनुरूप बनाकर रखें।
                                        आइए इस नववर्ष पुनः नए सिरे से जीवन की शुरुआत करें, इस शानदार अवसर पर शानदार संकल्प लें। अपने बहुमूल्य समय को श्रेष्ठता के प्रति समर्पित कर जीवन को नए रूप-रंग से संवारें। तमाम बुराइयों को तिलांजलि देकर अच्छाइयों को अपनाकर जीवन को नए अंदाज में जीने का संकल्प लें।
-- उमेश कुमार साहू 

हंसी है रोगों की 'अचूक दवा'   
                                              


                                       हंसी का हमारे जीवन में बड़ा महत्व है। यह कई रोगों की अचूक दवा है शारीरिक और मानसिक दोनों की। हंसी विहीन जीवन नीरस और विविध रोगों का घर होता है। आज की भागदौड़ भरी व्यस्त जिंदगी में तनाव और चिंताएं दिनोंदिन बढ़ती जा रही है ऐसे में हंसी एक बड़ी औषधि का काम करती है। हंसने और ठहाके लगाने से शरीर में एर्डोफिन हार्मोन का उत्सर्जन होता है जो शरीर में सक्रियता, स्फूर्ति एवं प्रसन्नता जगाती है। हमेशा प्रसन्नचित्त रहने और दिल खोलकर हंसने से शरीर में रक्त संचार तीव्र हो जाता है, फेफड़ों में भरपूर प्राणवायु पहुंचती है। यदि मनुष्य दिन भर में 40 मिनट खुलकर हंस ले तो अनेक रोग स्वत: समाप्त हो जाये। चिकित्सा की सबसे सरल, सस्ती, सुविधाजनक एवं प्रभावी युक्ति हंसी से बढ़कर कुछ भी नहीं।                                      
                                        हंसने से कई हर्मोन एवं पाचक एंजाइम का स्राव होता है, जिससे हृदय रोग, सिरदर्द, उच्च रक्तचाप, मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से निबटने में मदद मिलती है। खिलखिलाकर हंसने से वक्ष, पेट, फेफड़ों और लीवर की अच्छी कसरत हो जाती है। हंसने से शरीर की श्वेत रक्त कोशिकाओं, टी-कोशिकाओं और शरीर की सुरक्षा संबंधी सभी हिस्सों की शक्ति बढ़ती है। हंसने से मुंह की लार में एंटीबॉडीज बनते हैं जो बीमारियों से हमारी रक्षा करते हैं। टीबी जैसे खतरनाक रोग भी खुलकर हंसने से ठीक हो जाता है। हंसने से कोशिकाओं का निर्माण तेजी से होता है और शरीर में ऊर्जा लेवल भी बढ़ता है। स्पांडीलाइटिस, आर्थराइटिस आदि रोगों में भी हंसी दर्द कम करने में मददगार साबित होती है।                                                                                   मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी हंसी एक अहम कारक है, जो बिल्कुल मुफ्त पाई जा सकती है। तनाव, उदासी, अनिद्रा की रामबाण औषधि है हंसी। स्ट्रेस हार्मोंस कार्टिसोल व स्पाईनपराइन का स्तर भी हंसने से कम होता है। इसलिए जब भी तनाव में हों तो जी भर के हंसिए और फर्क महसूस कीजिए। नवीनतम शोधों में पाया गया है कि 10 मिनट की हंसी रक्तचाप को 10-20 अंक कम कर देती है। हंसने का एक फायदा हमारे सौंदर्य से भी जुड़ा है। हमेशा खुश रहने वाले के चेहरे पर कभी झुर्रियां नहीं पड़ती और चेहरा नए तेज के साथ दमकता रहता है। जिन परिवारों  में हंसी-ख़ुशी का माहौल बना रहता है वहां सदा खुशहाली छाई रहती है जिससे उनमें एकता बनी रहती है।                                        
                                           मार्क ट्वेन के अनुसार - 'मानव जाति के पास सही अर्थों में एक ही अस्त्र है और वह है हंसी।' कितनी बड़ी विडम्बना है कि तनाव के उपचार के लिए करोड़ों रूपये दवाइयों पर फूंक दिए जाते हैं, लेकिन जो सबके पास है मुफ्त का इलाज हंसी उस पर ध्यान नहीं जाती।                                      शायर जफर गोरखपुरी का एक शेर है -
हद से अधिक संजीदगी, सच पूछो तो रोग,
आगा पीछा सोचते, बूढ़े हो गये लोग।                               
                                              सचमुच जो व्यक्ति दिन भर गंभीर और नीरस बने रहते हैं, वे स्वयं तो दुखी और बीमार रहते हैं दूसरों के उत्साह को भी ठंडा कर देते हैं। हंसी के लाभ अनेक हैं इसलिए दिन भर में हंसने के लिए समय अवश्य निकालें। हंसमुख लोगों से मिलें, चुटकुले व हास्य कथाएं पढ़ें। हास्य कार्यक्रमों में भाग लें। हंसने का कोई मौका न छोड़िए। यह जीवन को खुशनुमा और उमंग-उल्लास से परिपूर्ण बनाने वाली चमत्कारिक जादुई छड़ी है। तो खूब हंसे और हंसाएं।
-- उमेश कुमार 

पर्व विशेष : दीपावली      
DIWALI ARTICLE IN HINDI 


शुभ संकल्पों का उजास बिखेरें 
दीपावली कुविचारों और दुर्भावों को तिलांजलि देकर नवसंकल्प लेने का पर्व है। अंतर्मन में सदविचारों, सुकर्मों का दीप सदा दैदीप्यमान रहे ऐसी कामना हर जन में होनी चाहिए। आइए इस दीपपर्व पर हम दिखावे से दूर, सादगी से परंपराओं का निर्वाह करते हुए नवसंकल्पों का दीप प्रज्वलित कर दीपावली के शुभ संदेशों को जीवन में उतारें और पर्व को सार्थक बनाएं।     
बुराइयों का सफाया करें
दीपावली के आगमन के साथ प्रारंभ होता है घर-आंगन की साफ-सफाई । सभी चाहते हैं कि उनका घर व आसपास गंदगी मुक्त हो जाए, लेकिन कितना अच्छा हो यदि हम इस गंदगी के साथ ही अपनी मानसिक गंदगी का भी सफाया करें, यानि मन में व्याप्त नकारात्मक विचार, संकुचित दृष्टिकोण, निजी स्वार्थ, आलस्य, उन्माद, आक्रोश, अहंकार, घृणा, द्वेष, लालच आदि दुर्भावों को निकाल फेंके। इनकी जगह सकारात्मक सोच, नवीन रचनात्मकता, धैर्य, विवेक, साहस, प्रेम, सौहार्द्र, दया, करुणा आदि सद्भावों को जीवन में शामिल करें, तो निश्चित रूप से व्यक्तित्व तो निखरेगा ही सफलता का ऐसा उजास फैलेगा कि हर दिन दीपावली होगी।            
उचित और न्यायपूर्ण तरीके से धन कमाएं   
दुनिया में आज धन को ही सब कुछ मान लिया गया है। तमाम सुख-सुविधा, आराम के पीछे धन का हाथ है। धन के बिना जीवन की गाड़ी नहीं चल सकती। लेकिन यदि धन ही सब कुछ होता तो दुनिया में सबसे ज्यादा सुखी धनवान ही होते जबकि ऐसा है नहीं। धन-संपन्न बनिए, लेकिन निरंतर आवश्यक व उचित प्रयत्न करके। अनुचित और अन्यायपूर्ण तरीके से कभी धन प्राप्त करने का प्रयास नहीं करना चाहिए क्योंकि ऐसा धन टिकाऊ और शुभ फल देने वाली नहीं होती।               
एक दीप इनके लिए भी जलाएं 
हमारे आसपास न जाने ऐसे कितने लोग हैं जिनका अपना कोई नहीं, जो अभावग्रस्त हैं, जिनके जीवन में अँधेरा है गरीबी और अशिक्षा का। क्या हमारा दायित्व नहीं बनता कि हम उनके जीवन को खुशियों की रोशनी से आलोकित करें। दीपपर्व पर अपने बजट के अनुरूप गरीब बच्चों को मिठाइयां, फल, कपड़े व किताबें आदि खरीदकर जरूर दें। अनाथ आश्रम एवं वृद्धाश्रम जाकर उनकी जरूरत की चीजें भेंट करें। अपनों के लिए तो सब करते हैं लेकिन औरों को देने का आनंद ही अलग है। जब आप इस प्रकाशोत्सव के मौके पर इनके चेहरे पर मुस्कुराहट देखेंगे, तब आपकी खुशियां भी दोगुनी हो जाएंगी।                             
उजास की आराधना करें, संघर्ष की साधना करें      
जीवन में कई बार ऐसी विषम परिस्थितियां आती हैं, जब सर्वत्र अँधेरे का साम्राज्य नजर आता है, कोई रास्ता सुझाई नहीं देता, जिंदगी अवसाद, निराशा, डर, नकारात्मकता के गहन अंधियारे में खोने लगता है, ऐसे में अपने भीतर नवीन आशाओं के दीप जलाएं, सकारात्मक सोच व अँधेरे से लड़ने का आत्मबल विकसित करें। दृढ़ संकल्पित हो दीप की भांति उजास की आराधना करें, संघर्ष की साधना करें। लौ की तरह ऊँचाई की ओर जाने का लक्ष्य रखें यही हमारी प्रगति और उजाले की ओर बढ़ने का आधार है।      
-- उमेश कुमार साहू 

DIWALI SHOPPING 

           
                                         बड़ों से लेकर बच्चे जिस त्योहार का बेसब्री से प्रतीक्षा करते हैं उस पर्व दीपावली के आने में अब गिनती के दिन शेष हैं। दीपावली को यदि खरीदारी का त्योहार कहा जाय तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। घर की साफ-सफाई, रंग-रोगन से लेकर आभूषण एवं गृहस्थी की अन्य वस्तुएं जैसे टी.वी., फ्रिज, वाशिंग मशीन, सोफा,  ए.सी. आदि खरीदने के लिए अधिकांश लोग दीपावली की प्रतीक्षा करते हैं।   
                 
-- बजट बनाकर करें खरीदारी  
दीपावली पर खरीदारी का महत्व तो है ही, लेकिन कई बार झूठी शान, दिखावे, प्रतिस्पर्धा तथा लुभावने विज्ञापन के चलते बजट नियंत्रण के बाहर हो जाता है। ऐसा करके जहां त्योहार का उत्साह फीका पड़ जाता है वहीं यह बिगड़ा हुआ बजट साल भर संतुलित होने का नाम नहीं लेता। यदि थोड़ी सूझबूझ से काम लिया जाए और निर्धारित बजट बनाकर उसके अनुरूप खरीदारी की जाए तो दीपावली के बाद भी घर में उजियारा कम न होगा।    
            
-- जब फाइनेंस कराएं  
आज पूरा बाजार फाइनेंस पर टिका हुआ ही। कुछ रूपये दो और हजारों-लाखों का सामान घर ले जाओ। Finance कराते समय कंपनी के बारे में सभी जानकारी जुटा लें। ब्याज दर, मासिक किश्तें, सर्विस टैक्स आदि की पूरी जानकारी लें। फाइनेंस कराने से पहले दो-तीन कंपनियों की ब्याज दरें या मासिक किश्तों के बारे में जानकारी लें, जहां पर यह कम हो वहां से फाइनेंस कराएं। यदि एक से अधिक वस्तुओं का फाइनेंस करा रहे हैं तो मासिक किश्तें चुकाने के बारे में अच्छे से सोच लें कहीं किश्तों के चक्कर में मासिक बजट बिगड़ न जाएं।              
-- विशेष छूट से सावधान 
दीपावली के अवसर पर लुभावने ऑफर्स के साथ 'छूट' की बाढ़ सी आ जाती है, लेकिन छूट के आकर्षण में फंसकर अनावश्यक खरीदारी करना कतई हितकर नहीं। छूट Discount  में छिपे लूट को गहराई से समझें। किसी वस्तु की कीमत बढ़ाकर उसमें छूट दे रही कंपनियों से बचकर रहें। ऑफर्स पर ध्यान न देकर उत्पाद की क्वालिटी पर ध्यान दें।  

हिंदी टाइपिंग
सोशल मिडिया में हिंदी अत्यधिक प्रचलन में है, परंतु देवनागरी हिंदी का उपयोग बहुत कम हो रहा है और रोमन में हिंदी (हिंग्रेजी) का अत्यधिक चलन है। दरअसल, हिंदी टाइपिंग से अनभिज्ञ लोगों की यह भ्रामक धारणा होती है कि कंप्यूटर पर हिंदी टाइप करना बहुत कठिन काम है तथा हिंदी टाइपिंग के लिए किसी विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है, परंतु यह आवश्यक नहीं है। वास्तविकता में कंप्यूटर पर देवनागरी टाइपिंग की कई उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं, फिर भी लोग अपठनीय और उबाऊ रोमन हिंदी का ही उपयोग कर रहें हैं जोकि बहुत अजीब बात है।
वर्तमान में कंप्यूटर पर यूनिकोड के अत्यधिक प्रचलन के कारण हिंदी टाइपिंग हेतु कई फोनेटिक टूल्स उपलब्ध हैं। इन फोनेटिक टूल्स की सहायता से केवल अंग्रेज़ी या रोमन लिपि में टाइपिंग का ज्ञान होने पर भी देवनागरी लिपि में टाइपिंग किया जा सकता है। इन फोनेटिक टूल्स की विशेषता यह है कि यदि आप अंग्रेज़ी या रोमन लिपि में लिखेंगे तो वह अपने आप हिंदी/देवनागरी लिपि में परिवर्तित हो जाएगा। इसके बहुत से विकल्प उपलब्ध हैं, जिनमें माइक्रोसॉफ्ट तथा गूगल के टूल बहुत अधिक प्रचलन में हैं। इन दोनों टूलों के मुफ्त संस्करण को आप इंटरनेट से डाउनलोड कर सकते हैं। ये दोनों आर्टीफ़िशियल इंटेलिजेंट युक्त टूल हैं। आप इन दोनों टूलों को ऑनलाइन तथा ऑफलाइन दोनों तरीके से प्रयोग कर सकते हैं। माइक्रोसॉफ्ट तथा गूगल के टूलों की मुख्य विशेषता यह है कि इससे रोमन में टाइप करने पर शब्द स्वत: देवनागरी लिपि में परिवर्तित हो जाते हैं। ये टूल उपयोग करने में इतने आसान हैं कि प्रयोक्ता को ‘वह’ टाइप करने के लिए ‘wh’ ही टाइप करना पड़ता है। ये टूल्स आर्टीफ़िशियल इंटेलिजेंट युक्त हैं, जो उपयुक्त शब्द स्वयं चुन लेते हैं। मेरे ख्याल से नियमित प्रयोग के लिए ये दोनों ही टूल उपयुक्त हैं।
गूगल आधारित एक नि:शुल्क सुविधा यह भी है कि आप एक आसान तरीके से अपने दस्तावेज़ को बोलकर टाइप कर सकते हैं। गूगल की यह सुविधा जिसे ‘गूगल वाइस टाइपिंग’ कहते हैं, माइक्रोफोन युक्त कंप्यूटर तथा मोबाइल फोन दोनों में ही प्रयोग में लाई जा सकती है। कंप्यूटर में इस टूल के उपयोग के लिए आपके कंप्यूटर में क्रोम ब्राउज़र इनस्टॉल होना चाहिए। एंड्राइड आधारित मोबाइल फोन में इस टूल के उपयोग के लिए आपको प्ले स्टोर में जाकर ‘गूगल इंडिक कीबोर्ड’ डाउनलोड करके इनस्टॉल करना होगा। सामान्य गति और स्पष्ट रूप से बोलकर आप इस टूल की मदद से फेसबुक, ट्वीटर, ई-मेल, ब्लॉग, गूगल डॉक्स आदि पर शुद्ध देवनागरी में वाइस टाइपिंग कर सकते हैं।
राजभाषा विभाग, भारत सरकार ने भी एक श्रुतलेखन (स्पीच टू टैक्स्ट टूल) निर्मित किया है। यह टूल राजभाषा विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है। श्रुतलेखन टूल/सॉफ्टवेयर की विशेषता यह है कि जब प्रयोक्ता माइक्रोफोन में बोलता है, तब कंप्यूटर में उपस्थित ‘स्पीच टू टैक्स्ट प्रोग्राम’ उसे प्रोसैस कर पाठ्य/टैक्स्ट में बदलकर टाइप कर देता है। इसका भी उपयोग बेहद आसान है।
हिंदी टाइपिंग की इतनी सरल युक्तियाँ मौजूद होने के कारण अब हमे यह बात मन से निकाल देनी चाहिए कि हिंदी टाइपिंग कठिन है, तथा देवनागरी/हिंदी में टाइपिंग के लिए किसी विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है।
-- साभार : विज्ञान विश्व 

DUSSEHRA ARTICLE IN HINDI
विजयादशमी की हार्दिक शुभ कामनाएं  


आतंक के रावण से मुक्ति की आवश्यकता 

          समय के प्रवाह में जाने कितनी सदियां बह गई, लेकिन बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य यानि रावण पर राम की विजय का महापर्व आज भी हमारे समाज में पूरी श्रद्धा और आकर्षण के साथ रचा-बसा है। भगवान राम ने सच्चाई और साहस के बल पर असत्य, पाखंड और दुराचार के रावण का विनाश किया था। यह कालजयी घटना हमारी आत्मा की गहराइयों में आज भी जीवित है।
                   विजयादशमी आत्मबल प्राप्त करने का पर्व है, आत्मबल से विजय अवश्यंभावी है। आत्मबल के लिए शक्ति का साथ आवश्यक है और उपासना एवं शारीरिक दृष्टि से पुष्ट होने के लिए शरद ऋतु महत्वपूर्ण है। शरद ऋतु के शुक्ल पक्ष की यह दशमी विजय का उल्लास लेकर हमारे जीवन में उतरती है। राम की विजय और शक्ति साधना पूरी होने की तिथि एक ही है। राम ने नवरात्रि में शक्ति की आराधना की तब जाकर दसवें दिन रावण का संहार कर सके। जब कल्याण असत्य के पक्ष में हो जाएगा तो सत्य और शक्ति के सामने उसे झुकना ही पड़ेगा। जीवन में दुष्प्रवृत्तियों के विनाश के लिए सत्य को शक्ति की आराधना करनी होगी।
                   विजयादशमी आसुरी और राक्षसी प्रवृत्तियों से लड़कर इसे समाप्त करके मानवता को इससे मुक्ति दिलाने का पर्व है। संसार में जब भी आसुरी प्रवृत्तियों ने सिर उठाया देर सबेर उसका सर्वनाश ही हुआ है। आज का सबसे भयानक रावण आतंकवाद मानव जाति पर फिर कहर ढा रही है। इस रावण के कई सिर हैं। लेकिन हमारा गौरवशाली इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी आतंकवाद ने किसी भी रूप में सिर उठाया है, निश्चित रूप से उसका अंत हुआ है। बुराइयों का अंत अवश्यंभावी है। जब सत्य अपनी पूरी शक्ति के साथ प्रकट होता है, तो असत्य की सारी रुकावटें ध्वस्त हो जाती हैं। 
--उमेश कुमार साहू 

  • ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता 4 

    मित्रों 'सफलता सूत्र' आपके लिए लेकर आया है, हिन्दी की पहली 'ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता'। यहां आप पाएंगे ज्ञान और उपहार का खजाना। यह प्रतियोगिता प्रारंभ करने का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रभाषा हिन्दी का सम्मान व आप सभी का ज्ञान अभिवर्धन करना है। यह प्रतियोगिता उन सभी प्रतिभाशाली मित्रों को प्रोत्साहित करने के लिए है जो इंटरनेट पर समय का सदुपयोग करते हुए अपने ज्ञानकोश में वृद्धि व उपहार प्राप्त करना चाहते हैं।

    ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता में शामिल होने संबंधी विस्तृत जानकारी व नियम-शर्तें :-
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     इस प्रतियोगिता के अंतर्गत विविध विषयों से चुने हुए 10 प्रश्न पूछे जायेंगे, जो वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Multiple Choice) के रुप में होंगे।
    -- प्रश्नों के उत्तर भेजने के लिए नीचे दिए गए फॉर्म को भरकर अपना सही उत्तर पर टिक लगाकर सबमिट कर दें.
    -- फॉर्म में अपना नाम, पूरा पता, मोबाइल नंबर व ईमेल आई डी अवश्य लिखें। विजेता घोषित होने पर सिर्फ आपका नाम व राज्य का नाम प्रकाशित किया जाएगा, पूरा पता, मोबाइल नंबर, ईमेल आई. डी. नहीं। यानी आपकी प्राइवेसी का पूरा ध्यान रखा जाएगा।
    -- इस प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए किसी भी प्रतिभागी से किसी भी प्रकार का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा यह पूरी तरह निःशुल्क है। उपहार के लिए भी कोई राशि नहीं देना होगा।
    -- ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता पाक्षिक यानि महीने में दो बार आयोजित की जाएगी। महीने की 1 तारीख और 15 तारीख को।
    -- सभी 10 प्रश्नों के सही हल भेजने वाले प्रतिभागी ही उपहार के ड्रा के लिए चयनित होंगे।
    -- 1 तारीख वाले प्रतियोगिता का सही हल व विजेताओं के नाम 14 तारीख को व 15 तारीख वाले का 30 तारीख को 'सफलता सूत्र.कॉम' में प्रकाशित किया जाएगा।
    -- विजेताओं के नाम प्रकाशित होने के 5 दिनों के भीतर उनका मोबाइल रिचार्ज कर दिया जाएगा.
    -- एक भी सही उत्तर प्राप्त नहीं होने की स्थिति में प्रतियोगिता की समयावधि आगे 15 दिन के लिए बढ़ा दी जाएगी।
    --1 तारीख को पूछे गये प्रश्नों का उत्तर 13 तारीख शाम तक एवं 15 तारीख वाले का सही हल 29 तारीख शाम तक भेज दें।
    -- एक प्रतियोगिता में 10 से अधिक प्रतिभागी का सही हल मिलने की स्थिति में विजेताओं का चयन ड्रा द्वारा किया जाएगा।
    -- उपहार (मोबाइल रिचार्ज) दस विजेताओं को प्रदान किया जाएगा, जिसका चयन ड्रा द्वारा होगा।

    उपहारों का विवरण :-

    प्रथम उपहार     -   50/- का मोबाइल रिचार्ज
    द्वितीय उपहार -   50/- का मोबाइल रिचार्ज
    तृतीय उपहार    -   50/- का मोबाइल रिचार्ज
    चौथा उपहार     -   20/- का मोबाइल रिचार्ज
    पांचवां उपहार   -   20/- का मोबाइल रिचार्ज
    छठवां उपहार    -   20/- का मोबाइल रिचार्ज
    सातवां उपहार   -   10/- का मोबाइल रिचार्ज
    आठवां उपहार   -  10/- का मोबाइल रिचार्ज
    नौवां उपहार     -   10/- का मोबाइल रिचार्ज
    दसवां उपहार    -  10/- का मोबाइल रिचार्ज

    नोट :- ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता संबंधी जानकारी नियमित रुप से मिलती रहे इसके लिए 'सफलता सूत्र.कॉम' को अपने ईमेल से सब्सक्राइब अवश्य करें या निम्न सोशल साइट्स के माध्यम से हमसे जुड़ें




    तो लीजिये प्रस्तुत है 'ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता क्रमांक - 4  के 10 प्रश्न :-

  • ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता 4 (1-15  अक्टूबर 2016)

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  • 1. दुनिया का सबसे बड़ा जू (चिड़ियाघर) किस देश में है?
     A. आस्ट्रेलिया   D. दक्षिण अफ्रीका
  • 2. इंसान ने सबसे पहले किस धातु का उपयोग किया था?
       C. पीतल D. तांबा
  • 3. योगेशवर दत्त किस खेल से संबंधित है?
     B. कुश्ती  D. क्रिकेट
  • 4. क्रिकेट खेल की शुरुआत किस देश में हुई?
    A. आस्ट्रेलिया   D. ब्राज़ील
  • इनमें से कौन सी कम्प्यूटर लेंग्वेज नहीं है?
      C. JAVA D. PHP
  • 6. 'प्रयाग' किस शहर का पुराना नाम है ?
    A. पटनाB. अजमेर  D. बनारस
  • 7. मुंशी प्रेमचन्द की प्रसिद्ध कहानी 'ईदगाह' में हामिद की दादी का क्या नाम था?
      B. सलमा  D. रूबीना
  • 8. पृथ्वी अपने स्थान पर किस दिशा में घूमती है?
     A. पश्चिम से पूर्व  C. दक्षिण से उत्तरD. पूर्व से पश्चिम
  • 9. वायु मंडल में नाइट्रोजन का प्रतिशत कितना है?
        
  • 10. कारों, ट्रकों एवं बसों में ड्राइवर की सीट के बगल में कौन सा दर्पण लगा होता है ?
      B. अवतल दर्पण  D. इनमें से कोई नहीं
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पिक्सेल(Pixel), मेगापिक्सेल(megapixel), रेसोलुशन(Resolution), एक्सपोज़र वैल्यू(Ev), ISO:
आजकल हम आधुनिक परिवेश में रहते है और अति आधुनिक उपकरणों का उपयोग करते है कुछ उपकरण आजकल हमारे जीवन का अभिन्नय अंग बन गए है खासकर मोबाइल फ़ोन ,कंप्यूटर,LED Tv, प्लाज्मा Tv इत्यादि।बहुत सारे उपकरण बाजार में उपलब्ध है पर स्मार्टफोन की बात ही कुछ अलग है और हो भी क्यों नही आज स्मार्टफोन का जमाना है आज अच्छे से अच्छे स्मार्टफोन रखना हमलोगों की पहली प्राथमिकता जो हो गयी है वैसे तो स्मार्टफोन में बहुत सारे उपकरण लगे होते है परंतु कैमरा और स्क्रीन(Display)उसके महत्वपूर्ण भाग है। जब बात कैमरा या डिस्प्ले की होती है तो कुछ शब्द हमे खास आकर्षित करते है वो है पिक्सेल,मेगा पिक्सेल,रेसोलुशन,एक्सपोज़र वैल्यू,ISO इत्यादि।
सर्वप्रथम पिक्सेल(Pixel): पिक्सेल शब्द वास्तव् में picture(Pix)और Element(Ex)से मिलकर बना है।पिक्सेल वो छोटे-छोटे बिंदु (Dots)और एलिमेंट्स है जिससे मिलाकर स्क्रीन (डिस्प्ले) बनी होती है। पिक्सेल तस्वीर का एक छोटा सा नियंत्रण किया जा सकने वाला हिस्सा( controllable एलिमेंट) है जो उसे स्क्रीन पर चित्रित(represent)करता है। हर एक पिक्सेल की प्रबलता(intencity)अलग अलग होती है। रंगीन डिस्पले में एक पिक्सेल 3 या 4 रंगों का का प्रतिनिधित्व करता है। जैसे की लाल,हरा नीला(RGB)और हरिनील (cyan), मैजेंटा(magenta), पीला(yellow) और काला(black) (CMYB)। स्क्रीन ऐसी ही लाखो या करोड़ो पिक्सल को प्रति इंच में जोड़कर बनायी जाती है।ज्यादातर डिस्प्ले में 3 या 4 रंगों की बहुत छोटी(Smallest)LED(light emitting diode)लगायी जाती है जो जरूरत के मुताबिक अपनी रौशनी को कम या ज्यादा करके किसी भी छवि को प्रदर्शित करता है। डिस्प्ले में पिक्सेल का प्रवंधन (arrangement)पर इंच के हिसाब से होता है प्रति इंच में जितने ज्यादा पिक्सेल होंगे पिक्चर क्वालिटी उतनी ही अच्छी होगी जिसे हम PPI(pixel per inch)या DPI(Dot per inch)भी कहते है।
मेगापिक्सेल(megapixel): मेगापिक्सेल का छोटा रूप MP है 1MP=1Million Pixel(दस लाख पिक्सेल)।कैमरो की क्षमता की माप मेगापिक्सेल से की जाती है अर्थात किसी डिजिटल या स्मार्टफोन कैमेरे की रेसोलुशन को मेगापिक्सेल में ही अंकन किया जाता है।जैसे-(3246×2448)
रेसोलुशन(Resolution): प्रति इकाई क्षेत्रफल में पिक्सेल की संख्या रेसोलुशन कहलाती है।रेसोलुशन हमे यह बताता है कि किसी तस्वीर में कितने पिक्सेल है जिससे हमें उसकी क्वालिटी का पता चल सके।आपने देखा ही होगा तस्वीरों या डिस्प्ले के आकार को क्रमशः (3246×2448,2560×1920)या(1280×1024,640×480)दर्शाया जाता है।इसका अर्थ है 3264×2448=7990272 पिक्सेल लगभग 8MP के समतुल्य है मतलब 8MP कैमेरे से ली गयी तस्वीर है।इस प्रकार आप किसी भी तस्वीर की रेसोलुशन को देख कर यह बता सकते है कि यह तस्वीर कितने मेगापिक्सेल के कैमेरे से ली गयी है।
डिस्प्ले में यदि दर्शाया गया हो(640×480)मतलब 640 पिक्सेल सामानांतर,480 पिक्सेल लम्बवत लगे है।
एक्सपोज़र वैल्यू(Ev): एक्सपोज़र वैल्यू वह है जो कैमरा की शटर स्पीड और f-नंबर के सम्बन्ध को प्रदर्शित करती है साथ ही लगातार तस्वीरे लेने पर दो इमेजो के बीच के अंतराल को नियंत्रित करती है और कैमेरे में प्रकाश का नियंत्रित करना भी EV का एक कार्य है।
ISO: यह एक प्रकार का सेंसर है।यह प्रकाश के प्रति कैमरा की संवेदनशीलता की क्षमता का मापदंड है और यह प्रकाश को नियंत्रित करने का सबसे महत्वपूर्ण सेंसर भी है।प्रकाश की संवेदनशीलता को ISO:100,200,400,800 इस प्रकार अंकन करता है।यदि आप किसी तस्वीर को दिन के उजाले में कैप्चर करते है तो ISO का मान कम होता है लेकिन जब तस्वीर रात में ली जाय तो ISO का मान ज्यादा हो जाता है वशर्ते आप ISO को स्वचालित(automatic mode)रखे हो तो।
सभी कैमरो में तस्वीर लेने के लिए इमेज सेंसर लगे होते है ये सेंसर भी पिक्सेल प्रणाली के जैसे ही कार्य करते है। ये सेंसर इमेज कैप्चर करते समय कैमरा के लेंस में जो पिक्चर दिखता है उसे RGB(red, green, blue) कलर में से फिल्टर करके कैप्चर करते है।ये सेंसर हर प्रकार के प्राथमिक कलर की प्रवलता(intencity)को RGB कलर के हिसाब से रेकॉर्ड करते है जिससे तस्वीर की क़्वालिटी अच्छी होती है।इस तरह इमेज सेंसर हर एक Element को रिकॉर्ड करके पुरे फ्रेम में तस्वीर को तैयार करता है।मोबाइल फोन और डिजिटल कैमेरे में CMOS (Complementary Metal-Oxide Semiconductor)इमेज सेंसर का उपयोग किया जाता है।
यदि आप आकर्षक और स्पष्ट तस्वीर लेने के शौक़ीन है तो आपके लिए हमारी सलाह है कि आप ज्यादा मेगापिक्सेल कैमरा से लैस स्मार्टफोन को चुने पर अपने बजट का भी पूरा ध्यान रखे।
प्रस्तुति : पल्लवी कुमारी



ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता - 3 के लिए हमें बहुत सारे मित्रों ने अपने उत्तर भेजे हैं। सभी का हार्दिक आभार।
सभी प्रश्नों के सही हल भेजने वालों की संख्या 2 रही। 
विजेताओं के नाम इस प्रकार हैं।
-- प्रथम पुरस्कार -  50/- का मोबाइल रिचार्ज
विजेता - मुकेश कुमार प्रजापत, जालोर, राजस्थान 
-- द्वितीय पुरस्कार - 50/- का मोबाइल रिचार्ज
विजेता - संदीप कुमार, ग्वालियर (म.प्र.) 
नोट :- विजेताओं का मोबाइल रिचार्ज 5 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा।

सराहनीय प्रयास
                      हम उन मित्रों के नाम नीचे दे रहे हैं जिन्होंने अधिकतम प्रश्नों के उत्तर सही दिए हैं। इनके प्रयास सराहनीय हैं। आशा करते हैं आगे भी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेकर अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करेंगे व विजेता बनेंगे।
-- यशवंत राठौर, मंदसौर  (म.प्र.)
-- चंचल ठाकुर, रायपुर (छ.ग.)
-- मोह. उमर, फ़ैजाबाद (उ.प्र)
-- दशरथ विश्वकर्मा, रायपुर (छ.ग.)
-- अखिलेश कुमार शुक्ला, रायपुर (छ.ग.)
-- Arshad Siddiqui, Mukam (U.P.) 

ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता - 3  : सही उत्तर
उत्तर 1 - A. गैलीलियो
उत्तर 2 - D. ऑक्सीजन एवं हीलियम
उत्तर 3 - A. टिन
उत्तर 4 - A. जड़
उत्तर 5 - C. कोयम्बटूर
उत्तर 6 - C. लैक्टोज़
उत्तर 7 - B. भारत
उत्तर 8 - B. 1951
उत्तर 9 - A. पंच परमेश्वर
उत्तर 10 - C. अजमेर 

तैयार रहें : ज्ञान विज्ञान प्रतियोगिता - 4  के प्रश्न 1 अक्टूबर को पूछे जायेंगे।

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