Halloween party ideas 2015

अपने स्मार्टफोन में अच्छे बैटरी बैकअप Battery Backup की चाहत भला किसे नहीं होती। आखिर कैसे बढाई जाए बैटरी बैकअप। 
प्रस्तुत है कुछ छोटे-छोटे टिप्स जिसकी मदद से आप अपने फोन का बैटरी बैकअप बढ़ा सकते हैं। इसके लिए कोई भी एप्लीकेशन इंस्टाल करने की आवश्यकता नहीं है।

-- फोन में ब्लूटूथ Bluetooth, वाईफाई Wi-Fi, जीपीएस GPS, हॉट स्पॉट HotSpot का स्विच जरूरत नहीं होने पर बंद करके रखें।
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स्क्रीन ऑटो ऑफ़ अपनी सहूलियत के हिसाब से सेट करके रखें।
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स्मार्टफोन का ब्राइटनेस Brightness कम करके रखें, या ब्राइटनेस लेवल को ऑटो मोड़ में सेट करें। क्योंकि अधिकतम बैटरी खपत स्क्रीन में ही होती है।
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आवश्यकता नहीं हो तो 3G सर्विस के बजाय 2G सर्विस का प्रयोग करें, क्योंकि 3G सर्विस के मुकाबले 2G में बैटरी खपत कम होती है।
-- जिस जगह में नेटवर्क बहुत कम मिल रहा हो वहां फोन को एयरप्लेन मोड़ Airplane Mode में एक्टिवेट करके रखें।
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कीपैड टोन Keypad Tone को बंद करके रखें, साथ ही वाइब्रेशन मोड भी बंद करके रखें यदि जरूरत नहीं है तो।
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हम अक्सर बैक ग्राउंड में चल रहे एप्लीकेशंस को बंद करना भूल जाते हैं जो बैटरी खपत बढ़ा देती है। इसलिए इसे बंद कर दें।
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अनावश्यक नोटिफिकेशंस बैटरी डिस्चार्ज करता है इसलिए जरूरत हो उन्हीं नोटिफिकेशंस को चालू करके रखें।



कम्प्यूटर बार-बार हैंग हो रहा हो तो...
-- कम्प्यूटर का अर्थिंग चेक करें। यदि अर्थिंग नहीं मिल रहा हो तो ठीक कराएं।
-- चेक करें RAM चिप ठीक काम कर रहा है या नहीं, यदि नहीं तो इसे चेंज कर दें।
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कम्प्यूटर में हमेशा एक विश्वसनीय एंटीवायरस Antivirus इंस्टाल करके रखें।
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कम्प्यूटर  हैंग हो गया हो तो -
SHIFT CTRL ESC बटन दबाएं।
अब 'END TASK' पर क्लिक करें। 
कम्प्यूटर चलना शुरू हो जाएगा।
 


                                     आज प्राकृतिक परिवेश में बहने वाली नदियों का जल जिस स्तर तक प्रदूषित हो चुकी है, इस स्थिति में विश्वव्यापी उस चेतावनी को हकीकत समझें कि 21 वीं सदी का सबसे गंभीर संकट " जल संकट" होने वाला है। ' जल ही जीवन है' केवल नारा नहीं, एक सत्य है। आज भी परग्रही जीवन की तलाश की जाती है तो सबसे पहले जीवन के लिए अनिवार्य 'जल' के संकेत ढूंढ़े जाते हैं।
                                     हमारी धरती पर भी मानव सभ्यता का विकास नदियों के किनारे-किनारे हुआ है। लेकिन सभ्यता के विकास के साथ साथ आज ऐसा लगता है कि यह विकास विनाश की दिशा पर चल पड़ा है। आज देश की अधिकांश नदियों की दुर्दशा देखकर कोई भी बुजुर्ग बरबस कह उठेगा, हमारे जमाने में यह नदी ऐसी तो नहीं थी। दिसंबर- जनवरी से पहले ही जलधाराओं का सूखना एवं शेष जल का प्रदूषित हो जाना, यदि यही विकास है तो हमें अपनी गतिविधियों पर पुनर्विचार करना होगा। वनों के बेतहाशा विनाश के चलते पत्थर टूट-टूटकर रेत बन नदियों में समाते गये जिससे उनमें उथलापन आ गया।
                                         बांध एक आवश्यकता है लेकिन नदी में प्रवाह रहना भी जरूरी है। इस सत्य को समझते हुए दोनों के बीच समन्वय वाली जलनीति बनाने की कोशिश की जानी चाहिए। जीवनदायिनी नदियों को स्वयं बर्बाद करने पर तुले लोगों को रोकने के लिए शासकीय प्रयासों के अलावा जनजागरण अत्यंत आवश्यक है अन्यथा इस सदी के सबसे बड़े संकट का सामना करने के लिए हमें तैयार रहना होगा।


21 साल की उम्र में मिलेगा जमा राशि का लाभ
                                      भारत सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढाओ कार्यक्रम के तहत सुकन्या समृद्धि योजना शुरू की है। जिसमें कोई भी व्यक्ति बेटी के जन्म लेने पर उसके नाम पर पोस्ट ऑफिस में खाता खुलवा सकता है। चौदह साल तक राशि जमा करने के बाद 21 वें साल पूरी राशि को ब्याज सहित निकाल सकते हैं। इसके लिए उसे प्रतिमाह न्यूनतम 1 हजार रुपए बेटी के खाते में जमा करना होगा। यह प्रक्रिया उसे 14 साल तक अपनानी होगी। जिसके बाद 15वें साल से 21 साल तक खाते में कोई भी राशि जमा नहीं करना पड़ेगा। 21 साल पूरे होते ही खाता मैच्योर हो जाएगा और खाते में जमा कुल राशि पर 9.1 प्रतिशत सालाना दर से 21 साल का ब्याज सरकार देगी।

होली विशे HOLI ARTICAL : हीं रं दे रं

                      उमंग-उल्लास के पावन पर्व होली में मौज-मस्ती करने का अपना अलग ही मजा होता है। इस दिन हम सभी रंगों का जमकर इस्तेमाल करते हैं। लेकिन होली के ये रं-बिरंगे रंग आधुनिकता और कृत्रिमता के चलते मिलावटी हो गये हैं। ये रंग स्वास्थ्य के लिए घातक भी हो सकते हैं। ऐसे में होली के अवसर पर रं खेलते समय सावधानी रखना अत्यंत आवश्यक है।
                                     होली के रंगों में अधिकांशतया पाउडर या सूखे
रंएस्बेस्टस टाल्क, चॉक पावडर या सिलिका से बने होते हैं। इन रंगों में चमक लाने के लिए ग्लास या माईका पावडर मिलाया जाता है। गुलाल व रंगों के रासायनिक विश्लेषण में पाया गया है कि इनमें ऐसे हानिकारक रसायन व धातुएं मौजूद होती हैं जिनसे त्वचा व श्वास की एलर्जी तथा अन्य बीमारियां हो सकती हैं। गुलाल को मुख्यत: स्टार्च, अभ्रक, डेक्सट्रिन,सोपस्टोन और साधारण रंआदि मिलाकर बनाया जाता है। साधारणत: ऐसे मिश्रण का शरीर पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता, लेकिन जहरीली प्रकृति के रसायन के इस्तेमाल से त्वचा व श्वास प्रक्रिया पर घातक प्रभाव पड़ता है।
                                      सामान्यत: बाजार में तीन प्रकार के
रं उपलब्ध होते हैं - पेंट्स, ड्राई पाउडर और वाटर कलर्स। पेंट्स में लेड ऑक्साइड, कॉपर सल्फेट, एल्युमीनियम क्रोमाइड और मरक्यूरी जैसे जहरीले पदार्थ होने की वजह से त्वचा की एलर्जी व अस्थायी रूप से अंधत्व हो सकता है। ड्राई कलर्स में मौजूद केमिकल गुर्दे, लीवर, हड्डियां और सारी उपापचयात्मक प्रक्रियाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। रंगों में मिलाए जाने वाले अलग-अलग धातुओं में सबसे ज्यादा खतरा लेड (सीसा) से होता है, जो हमारे तंत्रिका तंत्र, गुर्दों और प्रजनन तंत्र पर दुष्प्रभाव डालते हैं।
                                       एक सर्वेक्षण के मुताबिक होली के अवसर पर बिकने वाले
रंगों में अधिकतर मिलावटी होते हैं, जिससे आंखों में जलन व कम दिखाई देना, चेहरे की त्वचा पर रूखापन, सिरदर्द, रक्त विषाक्तता आदि का खतरा रहता है। ये रंबच्चों व महिलाओं के लिए अधिक नुकसानदायक होते हैं, क्योंकि उनकी त्वचा अधिक संवेदनशील होती है। संवेदनशील त्वचा पर रंगों के कारण पहले सूखापन आता है फिर बाद में संक्रमण के कारण इरिटंट डर्मेटाइटिस रोग हो जाता है।
                                        होली के
रं खरीदते समय विशेष सावधानी रखें। होली खेलते समय शरीर के संवेदनशील अंगों जैसे आंखों को हमेशा बचाकर रखें। रंगों से स्कीन एलर्जी हो गया हो तो डॉक्टर को दिखाएं।रं ब्रांडेड व आइ एस आइ ट्रेडमार्क देखकर ही खरीदें। सस्ते रंन खरीदें ये मिलावटी हो सकते हैं। याद रखें होली के रंगों से जुडी किसी भी समस्या का बाद में सामना करने से अच्छा है सावधानी। बेहतर यही है कि रासायनिक तत्वों से बने इन रंगों की बजाय प्राकृतिक चीजों से बने रंगों का प्रयोग किया जाए।