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    " बसंत - एक संपूर्ण जीवन दर्शन "   

               साल के छ: मनोरम ऋतुएं। इनमें सबसे अधिक सरस, मादक और चित्ताकर्षक ऋतु वसंत ही है। कवियों और मनीषियों ने इसे काव्यात्मक रूप से ऋतुराज कहा है। वसंत न सिर्फ एक मौसम है, बल्कि एक सम्पूर्ण जीवन दर्शन है । यह तन-मन में नवोत्कर्ष, नव उल्लास, नवसृजन, नव उन्नति लेकर आता है। यही वह मौसम है जब सर्वत्र वातावरण सम, स्वच्छ, निर्मल, शांत हो जाता है। प्रकृति में उर्वरा शक्ति के संवर्धन का मौसम है वसंत।
पंडित सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' जी का वसंत वर्णन देखिये -
'सखी बसंत आया
भरा हर्ष वन के मन
नवोत्कर्ष छाया
किसलय वसना नव वयलातिका
मिली मधुर कर तऊ पतिका
मधुप वृंद बन्दी पिक स्वर
नभ सरसाया
सखी बसंत आया।'
                          बसन्तागमन के साथ ही प्रकृति में पलाश, कचनार, टेशू, सेमल, नीलकमल, मंदार और बसन्तरानी इंद्रधनुषी रंग लेकर उपस्थित होते हैं। इन फूलों के मादक गंध से सम्पूर्ण धरा मदमस्त होकर झूमने लगता है। फागुन आते-आते बसंत अपने पूरे यौवन को प्राप्त होता है और धरा-अंबर अबीर-गुलाल से भर उठता है तथा मानव मन उमंगित प्रफुल्लित हो खुशियों के गीत गाने लगता है।
                        बसंत ऋतु में ही विद्या की देवी मां सरस्वती की आराधना करके अज्ञानता के अंधकार को दूर करने की कामना की जाती है। संगीतज्ञ इस दिन अपने वाद्ययंत्रों की पूजा करके देवी सरस्वती की विशेष कृपा पाने की प्रार्थना करते हैं। बच्चों को बोलना या लिखना भी आज के दिन सिखाया जाता है।
                         बसंत ऋतु जिसमें मौसम मनोरम हो जाता है न अधिक ठंड, न अधिक गर्मी, न अधिक वर्षा, नव विचारों और नव कल्पना के लिए अत्यंत उपयुक्त होता है वसंत। यही समय कोयल के गीतों का पपीहे की पीहू का होता है। सरसों-अलसी के पीले - नीले फूलों से आच्छादित प्रकृति के दर्शन मात्र से ही वर्षों की थकान व तनाव मिट जाती है।
                           मदनोत्सव या कामदेव पर्व के रूप में भी बसंत पंचमी को मान्यता है। इस दिन स्त्रियां अपने पति की कामदेव के रूप में पूजा करती हैं। पति भी अपनी सोलह सिंगार में सजी-धजी पत्नी का फूलों की माला और कोई उपहार देकर सम्मान करते हैं।
आइए इस मनोरम वासंतिक नव बेला में हम भी मिलकर ऋतुराज बसंत का हार्दिक स्वागत करें।

NATIONAL YOUTH DAY -
Birthday of Swami Vivekanand - 
स्वामी विवेकानंद के सुविचार -
-- युवा वही होता है जिसके हाथों में शक्ति, पैरों में गति, हृदय में ऊर्जा, और आंखों में सपने होते हैं...
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युवाओं उठो, जागो और उद्देश्य प्राप्ति के पहले मत रुको।
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जिंदगी में जोखिम उठाना जरूरी है। जीतने पर आप नेतृत्व कर सकते हैं, हारने की सूरत में दूसरों को दिशा दिखा सकते हैं।
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बच्चों को अमीर होने की नहीं, खुश रहने के संस्कार दें। बड़े होकर वे वस्तुओं की कदर करेंगे न कि उनकी कीमत की।
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जिस प्रकार स्वर्ग में, उसी प्रकार इस नश्वर जगत में भी तुम्हारी इच्छा पूर्ण हो, क्योंकि अनंत काल के लिए जगत में तुम्हारी ही महिमा घोषित हो रही है एवं सब कुछ तुम्हारा ही राज्य है।
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जो मनुष्य इसी जन्म में मुक्ति प्राप्त करना चाहता है उसे एक ही जन्म में हजारों वर्ष का काम करना पड़ेगा।
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संभव की सीमा जानने का केवल एक ही तरीका है, असंभव से भी आगे निकल जाना।

सब्सिडी और बिना सब्सिडी वाले गैस सिलेंडर के संबंध में किसी भी तरह की अधिक जानकारी और नि:शुल्क आवेदन पत्र के लिए भारत सरकार की इस  वेबसाइट पर जाएं -
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सुस्वागतम नववर्ष। 
                       आज नये साल का पहला दिन है। आंखें बंद कर लीजिये, शांत गहरे भाव से एक संकल्प लीजिये और आशा जागृत कीजिए इस संकल्प को इस वर्ष पूरा करने का भरसक प्रयत्न करेंगे। क्योंकि आपके इन्हीं प्रयासों के बदौलत आपके आने वाले दिन खुशियों भरे होंगे, आशाओं भरे मौसमों के होंगे, नवगीत गुनगुनाने के होंगे, हवाओं संग बहने के दिन होंगे।
                        नववर्ष, नवसृजन, नवआशा, नवजीवन, नवकल्पना, नवधारणा का समागम है। नव उमंग और नव उत्साह के नव संचार का वर्ष है। आने वाले पलों के प्रति हम सभी के मन में जिज्ञासा रहती है क्योंकि यह एक अज्ञात रहस्य की तरह रहता है। जहां विगत की अच्छी- बुरी स्मृतियां हमें हंसाती-रुलाती है वहीं भावी पलों का आकर्षण हमें जीने की नई उम्मीदें प्रदान करता है।
                           नववर्ष मात्र वर्ष का शुभागमन ही नहीं अपितु नव विचारों के अंकुरित होने का मौसम भी है। कुछ अधूरी आशाएं और सपने जिसे पूरा करने का दृढ संकल्प मंजिल की ओर बढ़कर उसे संजो लेने का लक्ष्य, कुछ कर गुजरने की चाहत और खुशियों को समेटने की उम्मीद जैसे अनेक सौगातें लेकर आता है नववर्ष। तो क्यों न इस नववर्ष में कुछ ऐसा कर जाएं जो हमारे लिए यादगार तो बने ही साथ ही दुनिया के लिए भी एक यादगार उपहार बन जाए।

" नववर्ष की हार्दिक शुभ कामनाएं।"  
HAPPY NEW YEAR