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चाणक्य नीति Chanakya Neeti : स्वर्ग और नरक कहां है कैसा है ? 


यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या छन्दाsनुगामिनी।
विभवे यश्च संतुष्टस्तस्य स्वर्ग इहैव हि ॥
-- चाणक्य नीति                                              

                                                 जिसका पुत्र उसके वश में हो, पत्नी अनुगमन करने वाली यानि आज्ञानुसार चलने वाली हो और जो धन-वैभव यानि आर्थिक रूप से संतुष्ट हो, ऐसे मनुष्य के लिए इसी धरती में स्वर्ग है
                                             स्वर्ग और नरक का विचार आते ही मन चित्र-विचित्र कल्पनाओं की दुनिया में विचरने लगता है। स्वर्ग की कल्पना हम एक ऐसे सौंदर्य से परिपूर्ण, अलौकिक, निराली, आनंदमयी दुनिया से करते हैं जहां प्राणी की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती होगी और वह स्थान सुख, समृद्धि, वैभव से परिपूर्ण होगा। वहीं नरक की कल्पना में एक ऐसा भयावह चित्र मानस पटल पर उभर कर आता है जो स्थान दुःख, शोक, भय, क्लेश, कलह, दरिद्रता, बीमारी, गंदगी, प्रताड़ना और आतंक से भयाक्रांत होगा।
                                                वैसे तो स्वर्ग और नरक के बारे में हमारी कल्पनाओं की कोई सीमा नहीं और दुनियाभर में इस पर अनेक मान्यताएं भी प्रचलित है। लेकिन इस बारे में प्रामाणिक रूप से आज तक कोई कुछ भी नहीं बता सका, क्योंकि इन दोनों जगहों में यदि कोई गया भी होगा तो कभी वापस लौटकर बताने नहीं आया।
                                                 इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने इस धरती को ही स्वर्ग बताया है। यदि संतान आपका कहना मानता है, पत्नी आपके इच्छानुसार चलने वाली है और जिसे अपने धन पर संतोष है तो ऐसे व्यक्ति ने इस धरती पर ही स्वर्ग को पा लिया।
                                                   चाणक्य के इस श्लोक का सार यही है कि स्वर्ग और नरक हमारे जीवन की स्थितियां हैं, जिसका अनुभव हमें इस धरती पर ही करना होता है। जब हम सुख, समृद्धि से पूर्ण, स्वस्थ व आनंदमय स्थिति में होते हैं, तो स्वर्ग का अनुभव करते हैं और जब दुःखी, चिंताग्रस्त, भयभीत और तकलीफ में होते हैं, तो नरक का अनुभव करते हैं।
                                                  यहां पर एक गहरी बात यह भी है कि स्वर्ग या नरक हमारे ही बनाए हुए हैं, यानि ये दोनों स्थितियां हमारे कर्मों से ही निर्मित होता है।
-- उमेश कुमार 

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                                   https://youtu.be/JfIuFnFDB14


दीपावली विशेष लेख 2017 
इन लोगों पर होती है लक्ष्मी जी मेहरबान, कभी नहीं होती रुपए-पैसे की कमी


                                                              देवी लक्ष्मी जी को धन-संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है। यदि आप चाहते हैं कि आपके घर-परिवार, जीवन में मां लक्ष्मी जी की कृपा सदा बनी रहे तो यह जानना जरूरी है कि लक्ष्मी जी किन लोगों पर कृपा बरसाती है और जिनके पास कभी धन-दौलत की कमी नहीं होती -
सौभाग्यशाली - जो अपने भाग्य के भरोसे नहीं बैठकर निरंतर निस्वार्थ भाव से कर्म करते हुए अपना भाग्य बदलने प्रयासरत रहता है।
सच्चरित्र - जो अपने चरित्र पर दिखावे या बुरे कर्म का दाग न लगने दे, साथ ही अपने सद्कर्मों के साथ पुरुषार्थ में लगा हो।
जितेंद्रिय - जितेंद्रिय यानि जिसने अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण पा लिया हो, जो इंद्रियों के वश में न होकर अविराम अपनी मंजिल की ओर बढ़ते जाता है।
कर्तव्यपरायण - जो अपने कर्तव्य के प्रति समर्पित हो और मुश्किलें आने पर भी अपने पथ से न डिगे।
कृतज्ञ - जो अपने दिशा निर्धारकों, सच्चे मित्रों या सहयोगियों, विषम परिस्थियों के मददगारों का कृतज्ञ हो।
अक्रोधी - जिसने अपने क्रोध पर विजय पा लिया हो और नकारात्मक विचारों को दूर कर जीवन से क्रोध निकालकर सकारात्मक रहता हो।
निडर - जो हर विषम परिस्थितियों एवं राह में आने वाली रुकावटों का निडरता के साथ जूझते हुए आगे बढ़ता हो।
ईश्वर पर विश्वास - जो जीवन में आने वाले सुख-दुःख के प्रति समभाव रखते हुए ईश्वर पर दृढ़ आस्था व विश्वास रखता हो।
स्वयं पर भरोसा - जो अपनी क्षमता और योग्यता पर विश्वास करते हैं, जो अपने भीतर छिपी क्षमता को उभार कर, प्रतिभा को निखार कर जितना आगे बढ़ता है, लक्ष्मी जी वहां स्वयं उपस्थित रहती हैं।
जागरूक - लक्ष्मी जी का वाहन है उल्लू। उल्लू प्रतीक है जागरूकता का, चौकसी का। जो जीवन के प्रति जागरूक हैं वहीं लक्ष्मी जी का वास है।
सृजनशीलता - जो जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सृजनशीलता एवं रचनात्मकता को शामिल कर आगे बढ़ता है। लक्ष्मी जी वहां स्वयं चली आती हैं।

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                                            https://youtu.be/qNEEIbAeQ44


खतरनाक है दिल से दिल्लगी 



                                                 प्राचीन काल से मानव शरीर का केंद्र बिंदु रहा है 'हृदय'। हृदय जिसे दिल कहा जाता है। हमारे जीवन में दिल की क्या अहमियत है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साहित्य एवं फिल्मों से लेकर मेडिकल साइंस तक सबसे ज्यादा महत्व दिल को दिया जाता है। मानवीय भावनाओं-संवेदनाओं एवं रिश्तों-संबंधों में भी दिल की मुख्य भूमिका मानी जाती है। जिस दिल को इतना महत्वपूर्ण स्थान मिला है हमारा भी यह दायित्व होना चाहिए कि उसकी देखभाल पूरे दिमाग के साथ करें।
                                              आज की आपाधापी जिंदगी में बीमारियां भी उतनी ही आपाधापी से आक्रमण कर रही है। मोटापा, तनाव, डिप्रेशन, नशा, प्रदूषण एवं कई अन्य कारणों से दिल पर सबसे ज्यादा बोझ पड़ने लगा है, जिससे दिल का दौरा भी। पहले जहां उम्रदराज लोग इसकी चपेट में आते थे, वहीं अब तो युवावर्ग भी इससे बच नहीं पा रहे हैं।
                                              बेहतर स्वास्थ्य और स्वस्थ हृदय के लिए कोई शार्टकट नहीं है, पर हाँ स्वास्थ्यवर्धक भोजन, नियमित योग-कसरत, भरपूर नींद, नशे से दूरी, समय-समय पर चेकअप आदि कुछ ऐसी बातें हैं जिसे अपनी नियमित दिनचर्या में शामिल करें तो निश्चित रूप से हमारे दिल की धड़कन जीवन भर सही ढंग से धड़कता रहेगा। 
आइए जानें कुछ बातें जिन्हें अपनाकर हम हृदयाघात व हृदय संबंधी बीमारियों से बच सकते हैं।

क्रोध पर नियंत्रण रखें - बार-बार क्रोध करने से दिल के क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ जाती है, साथ ही यदि आप क्रोध को दबाने की कोशिश करते हैं तो यह भी हृदय के लिए अच्छा नहीं है। गुस्से को मैनेज करने में ही दिल दुरुस्त रह सकता है, इसके लिए क्रोध की स्थिति में आँखें बंदकर 10-15 बार गहरी-लंबी साँस लें जिससे बढ़ा हुआ एड्रेनलिन नियंत्रित हो सके ताकि नकारात्मकता की अनुभूति बंद हो जाए।

फास्ट फूड बनाए दिल का मरीज - सप्ताह में 4 बार या उससे ज्यादा बार फास्ट फूड खाने वाले लोगों में हृदय की बीमारी से मौत की आशंका कई गुना बढ़ जाती है, इसलिए फ़ास्ट फ़ूड से बचें।

तनावमुक्त जीवन जिएं - ध्यान या योग के द्वारा तनावमुक्त होने का तरीका दिल को सुरक्षित रख सकता है। एकाग्रता की स्थिति प्राप्त करने वाले लोगों में हृदय 85 प्रतिशत अधिक स्वस्थ रहने की संभावना होती है। परेशानियां बांटने से मन हल्का होता है। तनाव से बचने के लिए प्रतिदिन 6 से 8 घंटे की नींद जरुर लें। लंबे काम के दौरान ब्रेक जरुर लें और खुद को रिलेक्स करें।

संतुलित आहार लें -घी-तेल से बनी चीजें जैसे पूड़ी, पराठे, समोसे, कचौड़ी, चाय-कॉफ़ी, कोल्ड ड्रिंक, एनर्जी ड्रिंक का अत्यधिक सेवन हृदय के लिए घातक है। इन चीजों के स्थान पर हरी-पत्तेदार सब्जियों, मौसमी फलों, अंकुरित अनाज, सलाद, जूस, छाछ, नारियल पानी आदि को प्राथमिकता दें। चीनी एवं नमक की अधिक मात्रा भी हृदय रोगों का कारण बनता हैं, इनसे बचें। दिन के मुकाबले रात में हल्का भोजन लें।

व्यायाम का करें नियमित अभ्यास  -सूर्योदय से पहले उठकर नित्यकर्मों से निवृत्त होकर क्षमतानुसार प्रात: भ्रमण करें। गहरी सांस लेते हुए तेज चलें, दौड़ लगाएं, साइकिलिंग करें। कसरत, योग एवं प्राणायाम का नियमित अभ्यास करें। ऐसा करने से मांसपेशियों को नई शक्ति मिलती है, शरीर में रक्त का संचार बढ़ता है जिससे हृदय स्वस्थ रहता है।

संगीत से दिल को दें आराम - 30 मिनट तक संगीत सुनने से धमनियों का कड़ापन दूर होता है एवं नाड़ी की गति सुधरती है। दिल के धमनियों के माध्यम से खून पंप करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है।

खर्राटों को अनदेखा न करें - खर्राटे संकेत देते हैं कि दिल के साथ कुछ समस्या है, खर्राटे दिमाग को ऑक्सीजनयुक्त खून सप्लाई करने वाली केरोटिड धमनियों में गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं। शोर भरे खर्राटों का संबंध नींद पूरी न होने से है। इसमें ब्लड प्रेशर, दिल का दौरा और स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है। इसके लिए चिकित्सक की सलाह जरुर लें।

अकेलापन नुकसानदेह - अकेले रहने वाले लोगों के दिल के दौरे, स्ट्रोक या हृदय संबंधी बीमारियों से मरने की आशंका बढ़ जाती है। मजबूत पारिवारिक व सामाजिक संबंधों का अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु से सीधा संबंध है।

समय पर कराएं जांच - तीस साल की उम्र पूरी होते ही हृदय की करवाएं। इसमें उच्च रक्तचाप, कॉलेस्ट्रोल एवं डायबिटिज की सामान्य जांच होती है। इसके बाद प्रतिवर्ष यह जांच करवाते रहें। परिवार में पहले किसी को हृदय संबंधी बीमारी रही हो तो खतरे की दोहरी आशंका होती है। ऐसे में दिल की रेगुलर जांच करवाते रहें।


                                                                                                    ➤ उमेश कुमार 

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DUSSEHRA ARTICLE IN HINDI
विजयादशमी की हार्दिक शुभ कामनाएं  



अब खत्म करना होगा आतंक के रावण को 
          समय के प्रवाह में जाने कितनी सदियां बह गई, लेकिन बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य यानि रावण पर राम की विजय का महापर्व आज भी हमारे समाज में पूरी श्रद्धा और आकर्षण के साथ रचा-बसा है। भगवान राम ने सच्चाई और साहस के बल पर असत्य, पाखंड और दुराचार के रावण का विनाश किया था। यह कालजयी घटना हमारी आत्मा की गहराइयों में आज भी जीवित है।
                   विजयादशमी आत्मबल प्राप्त करने का पर्व है, आत्मबल से विजय अवश्यंभावी है। आत्मबल के लिए शक्ति का साथ आवश्यक है और उपासना एवं शारीरिक दृष्टि से पुष्ट होने के लिए शरद ऋतु महत्वपूर्ण है। शरद ऋतु के शुक्ल पक्ष की यह दशमी विजय का उल्लास लेकर हमारे जीवन में उतरती है। राम की विजय और शक्ति साधना पूरी होने की तिथि एक ही है। राम ने नवरात्रि में शक्ति की आराधना की तब जाकर दसवें दिन रावण का संहार कर सके। जब कल्याण असत्य के पक्ष में हो जाएगा तो सत्य और शक्ति के सामने उसे झुकना ही पड़ेगा। जीवन में दुष्प्रवृत्तियों के विनाश के लिए सत्य को शक्ति की आराधना करनी होगी।
                   विजयादशमी आसुरी और राक्षसी प्रवृत्तियों से लड़कर इसे समाप्त करके मानवता को इससे मुक्ति दिलाने का पर्व है। संसार में जब भी आसुरी प्रवृत्तियों ने सिर उठाया देर सबेर उसका सर्वनाश ही हुआ है। आज का सबसे भयानक रावण आतंकवाद मानव जाति पर फिर कहर ढा रही है। इस रावण के कई सिर हैं। लेकिन हमारा गौरवशाली इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब भी आतंकवाद ने किसी भी रूप में सिर उठाया है, निश्चित रूप से उसका अंत हुआ है। बुराइयों का अंत अवश्यंभावी है। जब सत्य अपनी पूरी शक्ति के साथ प्रकट होता है, तो असत्य की सारी रुकावटें ध्वस्त हो जाती हैं। 


--उमेश कुमार साहू 


महान वैज्ञानिक,इंजीनियर और राष्ट्र निर्माण में अपना जीवन समर्पित करने वाले डॉ. विश्वेश्वरैया को भारत ही नहीं, विश्व की महान प्रतिभाओं में गिना जाता है. भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित डॉ. मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया के जीवन से जुडी एक प्रेरक प्रसंग आपके लिए प्रस्तुत है इस वीडियो में -


वीडियो देखें :- https://youtu.be/T7CHyVxasVw

 दिमाग को रखना हो चुस्त-दुरुस्त तो पढ़ें हिंदी


                                         अनेक शोध से अब यह प्रमाणित हो चुका है कि  हिन्दी की लिपि देवनागरी, दुनिया की अन्य भाषाओँ व लिपियों की तुलना में सर्वश्रेष्ठ है। हिन्दी भाषा की लिपि देवनागरी में मात्रा और अक्षर घुमावदार होते हैं, जिसे ऊपर-नीचे, दाएं-बाएं पढ़ना पड़ता है। ऐसा करने से वह दिमाग के दोनों हिस्सों को सक्रिय रखती है, जबकि अंग्रेजी भाषा की लिपि रोमन को एक ही दिशा में पढ़ना होता है, जो दिमाग के सिर्फ बाएं हिस्से को सक्रिय रखता है।
                                         शोधकर्ताओं के मुताबिक अंग्रेजी की तुलना में हिन्दी  भाषा बोलने से दिमाग अधिक सक्रिय रहता है, इसलिए दिमाग को चुस्त दुरुस्त रखना हो तो हिन्दी भाषा का अधिक से अधिक प्रयोग करें और आवश्यकता हो तभी अंग्रेजी में बात करें।
                                         अपने मस्तिष्क को चुस्त दुरुस्त व सक्रिय बनाए रखना है तो हिन्दी  में लिखे, हिन्दी में वार्तालाप करें। अब तो इंटरनेट पर हिंदी में सैकड़ों ब्लॉग और वेबसाइट संचालित हैं इन्हें नियमित रूप से पढ़ने की आदत डालें। स्मार्टफोन में भी हिन्दी में लिखने के अनेक टूल्स (ऐप) उपलब्ध हैं, इनका प्रयोग अवश्य करें।

क्यों चटकती है हड्डियाँ ?

उँगलियाँ चटकाते हैं तो हो जाएँ सावधान !



                                                            कसरत करने के दौरान या अंगड़ाई लेते समय कई बार हड्डियों के जोड़ों के चटकने की आवाज आती है, इसके अलावा कुछ लोगों को उंगलियाँ चटकाने की भी आदत होती है। आइए जाने हड्डियों के चटकने पर आवाज क्यों आती है। 
                                                            दरअसल हड्डियों के जोड़ों के चटकने के दो अलग-अलग कारण हैं। जब उंगलियाँ चटकाई जाती है, तब वे लगभग अपनी सीमा तक मोड़ दी जाती है। उंगलियों के जोड़ के आसपास द्रव पदार्थ भरा होता है, जिसमें वायु मिश्रित होती है। जब हम जाने-अनजाने में उंगलियाँ चटकाते हैं तो यह वायु बुलबुलों के रूप में द्रव पदार्थ से अलग होती है। इन्हीं बुलबुलों के कारण आवाज पैदा होती है, जिसे हम उंगलियाँ चटकना कहते हैं।
                                                          जब तक यह वायु दोबारा द्रव पदार्थ में घुलमिल नहीं जाती, तब तक फिर से उंगलियाँ चटकाने पर आवाज नहीं आ सकती। दूसरी ओर शरीर को ऐंठने, मोड़ने या अंगड़ाई लेने से हड्डियों के चटकने की आवाज आती है उसका कारण वे ऊतक हैं, जो मांसपेशियों और हड्डियों के बीच में रहते हैं। जब इन पर तनाव पड़ता है तो ये अपने स्थान से हट जाते हैं और इसी कारण से आवाज पैदा होती है, जिसे हम हड्डियाँ चटकना कहते हैं। इसकी पुनरावृत्ति का कोई निश्चित समय नहीं होता है, अर्थात कुछ लोगों में यह उसी समय दोबारा भी हो सकता है, कुछ के साथ नहीं भी हो सकता है।
उँगलियाँ चटकाते हैं तो हो जाएँ सावधान 
                                                           अक्सर कुछ लोग खाली बैठे बैठे या काम में लगे होने के बाद भी उंगलियों को चटकाते रहते हैं या गर्दन घुमाकर चटकाते हैं। लेकिन जरूरत से ज्यादा ऐसा करना काफी नुकसानदायक होता है। इससे गठिया (arthritis) रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। बार-बार उंगलियां चटकाने से जोड़ों के बीच का द्रव कम हो जाता है, जिससे जोड़ों की पकड़ कमजोर होने लगती है। साथ ही हड्डियों के जोड़ पर मौजूद ऊतक भी नष्ट हो जाते हैं, जो गठिया रोग का कारण बन सकता है।
➤ उमेश कुमार 

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बारिश पर चुनिंदा हृदयस्पर्शी शेरो-शायरी 
Best Collection of Heart Touching Shayari in Hindi



                                     शेरो-शायरी का अंदाज सचमुच निराला है। यह अंतरमन की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। शेरो-शायरी के माध्यम से शायर गागर में सागर भर देता है। मैंने आपके लिए लोकप्रिय शायरों की हजारों शेरों में से बारिश पर  कुछ चुनिंदा हृदयस्पर्शी शेरों को संग्रहित किया है। ये सभी ऐसे पुष्प हैं जो निश्चित रुप से आपके मन की बगिया को महका जाएंगी।   -- धन्यवाद


याद आई वो पहली बारिश
जब तुझे एक नज़र देखा था
नासिर काज़मी



उसने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं
भीगने वालों को कल क्या-क्या परेशानी हुई।
➤ जमाल एहसानी


मैं कि कागज की एक कश्ती हूँ
पहली बारिश ही आखिरी है मुझे
➤ तहज़ीब हाफी

'कैफ़' परदेस में मत याद करोअपना मकाँ
अब के बारिश ने उसे तोड़ गिराया होगा
  कैफ़ भोपाली


दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था
इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था
➤ क़तील शिफ़ाई

बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने
किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है
➤ निदा फ़ाज़ली



किसने भीगी हुई जुल्फों से ये झटका पानी 
झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी 
➤ आरजू लखनवी 




दिल में है लगी आग तो आँखों में है आंसू 
बरसात से जलता हुआ घर देख रहा हूँ 
  सुखनवर हुसैन 



घनघोर घटाएं हैं आसार है बारिश के 
निकलो न अभी घर से कागज का बदन लेकर 
➤ मोहसिन अली सुहैल 

मैं चुप कराता हूँ हर शब उमडती बारिश को
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है
 गुलज़ार

भीगी मिट्टी की महक प्यास बढ़ा देती है
दर्द बरसात की बूँदों में बसा करता है
  मरग़ूब अली

टूट पड़ती थीं घटाएँ जिन की आँखें देख कर
वो भरी बरसात में तरसे हैं पानी के लिए
  सज्जाद बाक़र रिज़वी

➡प्रस्तुति : उमेश कुमार 

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कहीं आप  वजन कम करने के लिए गर्म पानी में शहद और नींबू मिलाकर तो नहीं पी रहे हैं !



                                       उचित जानकारी के अभाव में या विभिन्न माध्यमों से मिलने वाले स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक जानकारियों के चलते कभी-कभी हम ऐसी चीजों का गलत तरीके से सेवन करते रहते हैं जो हमारे स्वास्थ्य को लाभ के बजाय नुकसान पहुँचाते रहते हैं।
शहद विकारग्रस्त हो जाता है                                     
                                      जैसा कि लोग वजन कम करने के लिए सुबह खाली पेट गुनगुने गर्म पानी में शहद और नींबू का रस मिलाकर पीते हैं। लेकिन क्या ऐसा करना सही है ? जी नहीं, आयुर्वेद के अनुसार शहद को किसी भी गर्म द्रव्य या पदार्थ के साथ सेवन करना वर्जित है क्योंकि ऊष्णता के संपर्क में आने से शहद विकार ग्रस्त हो जाता है और स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। कुछ मामलों में यह विष का काम करता है।
वैज्ञानिकों ने भी माना
                                  वैज्ञानिक रिसर्च से भी यह बात सामने आई है कि शहद को गर्म किया जाय तो उसका स्पेसिफिक ग्रेविटी कम हो जाता है साथ ही उसमें कुछ रासायनिक बदलाव भी आते हैं, जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है।
प्राकृतिक रूप करें सेवन                                  
                                      इसलिए शहद को प्राकृतिक यानि कच्चे रूप में लेना ही स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है, प्राकृतिक रूप में इसका एंटी इंफ्लैमटारी और एंटी बैक्टिरियल गुण भरपूर मात्रा में मिल जाता है।
तो क्या किया जाय                                  
                                      आप ठंडे पानी में शहद और नींबू का रस मिलाकर पी सकते है। गर्म पानी में सिर्फ नींबू निचोड़ कर पिएं।

 ➤ उमेश कुमार 

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Jio 4G फोन के लिए ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
JIO 4G Phone Booking Registration Process
JIO Free Phone Online Booking
How To Register Jio Rs 1500 Phone Online Booking


यदि आप रिलायंस जिओ के 4G  फ़ोन (1500 रूपये का) की प्री बुकिंग प्रॉसेस करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको जिओ की ऑफिशियल वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करवाना होगा।

रजिस्ट्रेशन करवाने की प्रक्रिया इस प्रकार है-
-- http://www.jio.com/ जिओ की वेबसाइट पर क्लिक करें।
-- होम पेज पर आपको इस फ़ोन की जानकारी दिखाई पड़ेगी।
-- अब आप Keep me Posted पर जाएं।
-- आपके सामने एक रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुलेगा।
-- इसमें आप अपना First Name, Last Name, Email, Phone Number भरकर सबमिट कर दीजिए।
-- आपका रजिस्ट्रेशन हो जाएगा और आपके फ़ोन पर रजिस्ट्रेशन होने का मैसेज आ जायेगा।